अलेक्जेंड्रा का लंदन भूलभुलैया टूटा
दर्पणों में उसकी समर्पण अनगिनत गुना हो पेंटहाउस के राज़ों में
अलेक्जेंड्रा के टूटे शीशों का रैविशमेंट
एपिसोड 2
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अंडरग्राउंड नीलामी की गूंज अभी भी मेरी रगों में धड़क रही थी जब अलेक्जेंड्रा पेत्रोव मेरे लंदन पेंटहाउस में कदम रखी, उसकी बर्फीली नीली आंखें मद्धम रोशनी को काटती हुईं सर्द आकाश के टुकड़ों की तरह। पुरानी दर्पणों से घिरी हुई जो उसकी सुंदर काया को अनंत प्रतिबिंबों में मोड़ देते थे, उसने दिमित्री को हराकर जाली शिल्प के दूसरे टुकड़े पर बोली लगाई—लेकिन असली इनाम तो मेरे साथ डील सील करना था। उसके राख-भूरा सुनहरी बाल सीधे रेशमी नदियों की तरह उसके लंबे पतले बदन पर गिर रहे थे, और मुझे पता था आज रात, इस प्रतिबिंबों के भूलभुलैया में, उसके राज़ मेरे स्पर्श से टूट जाएंगे। नीलामी का घंटा अभी मुश्किल से गिरा था लंदन के धड़कते दिल के नीचे की अंडरग्राउंड नीलामी में जब अलेक्जेंड्रा पेत्रोव ने अपनी नजरें मुझ पर टेरीं। दिमित्री का मुंह साये वाली कमरे के पार से जल रहा था, उसकी बोली उसके बेरहमी से बढ़ी हुई बोली से चूर हो गई थी जो उसे सुलगाता छोड़ गई। लेकिन उसने भीड़ के साथ जश्न नहीं मनाया। नहीं, वो मेरी तरफ सरक आई, उसका लंबा पतला बदन सिगार के धुएं और फुसफुसाते भाग्य के धुंध से चाकू की तरह कटता हुआ जो पोर्सिलेन और स्टील से ढला हो। 'मार्कस हेल,' उसने कहा, उसकी आवाज रेशमी धागे जैसी जो हल्के रूसी लहजे से लिपटी हुई, 'भूलभुलैया का दूसरा टुकड़ा इंतजार कर रहा है। क्या हम निजी तौर पर शर्तें चर्चा करें?' मैंने सिर हिलाया, उसे पुराने मेफेयर टावर के ऊपर मेरे पेंटहाउस में ले जाकर, जहां हर दीवार पर पुराने दर्पण लगे थे—भूले हुए जागीरों के अवशेष जो जगह को प्रतिबिंबों का अनंत भूलभुलैया बना देते थे। हर कदम हमारी पदचापों को अनंत में गुणा करता हुआ गूंजा, उसकी सुंदर काली रेशमी गाउन उसके गोरे फीके चमड़े पर फुसफुसाती हुई। जैसे ही लिफ्ट के दरवाजे...


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