कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर

चाँदनी उसके कंगन पर नाची तो तनाव निषिद्ध आग में भड़क उठा।

आयलिन की छुपी आग ने फर्ज़ का पर्दा जला दिया

एपिसोड 2

इस श्रृंखला की अन्य कहानियाँ

इन्फर्मरी में आयलिन की कांपती उंगलियां
1

इन्फर्मरी में आयलिन की कांपती उंगलियां

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर
2

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर

फील्ड टेंट्स में आयलिन की बुखार भरी रात
3

फील्ड टेंट्स में आयलिन की बुखार भरी रात

आयलिन का विद्रोही समर्पण कमांड को
4

आयलिन का विद्रोही समर्पण कमांड को

अयलिन की चाय पर सुलगती कबूली
5

अयलिन की चाय पर सुलगती कबूली

कैप्टन के साथ आयलिन की अमर ज्वाला
6

कैप्टन के साथ आयलिन की अमर ज्वाला

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर
कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर

मेरे क्वार्टर का दरवाजा आयलिन यिल्दिज के पीछे सिसकारते हुए बंद हो गया, हमें बेस की शांत गुनगुनाहट में सील कर दिया रात के बाद। उसकी यूनिफॉर्म उसके पतले बदन से चिपकी हुई थी, लेकिन वो चुराई नजर—शहद-भूरे आँखें अनिश्चितता और कुछ गहरी चमक के साथ झिलमिलाती हुईं—ने मुझे फँसा लिया। इन्फर्मरी में उसके फुर्तीले हाथों की अफवाहें मेरे पास पहुँच चुकी थीं, और अब, डिब्रीफ के बहाने से, मैं देखना चाहता था कि वो वाकई कितनी कुशल है। चाय हमारे बीच भाप उछाल रही थी, लेकिन असली गर्मी हवा में बन रही थी, अनकही वादों से भरी गाढ़ी।

मैंने आयलिन को देखा जब वो मेरे क्वार्टर में कदम रखी, दरवाजा नरम न्यूमेटिक सिसकारी के साथ बंद हो गया जो देर रात की गूँज जैसी थी। कमरा एक डेस्क लैंप की मद्धम रोशनी और संकरे व्यूपोर्ट से छनती चाँदनी की चाँदी जैसी चमक से जगमगा रहा था, जो चमकदार धातु के फर्श पर लंबी परछाइयाँ डाल रही थी। वो अपनी कुरक्रिस यूनिफॉर्म में खड़ी थी—घुटने तक की स्कर्ट में घुसा हुआ ओलिव-ग्रीन ब्लाउज जो उसके पतली टांगों को उभारता था—उसके गहरे भूरे घुंघराले बाल कंधों पर नरम लहराते हुए। वो शहद-भूरे आँखें इधर-उधर भटक रही थीं, मेरी जगह की सादगीपूर्ण लग्जरी को निगल रही थीं: भाप वाली चाय वाला नीचा टेबल, होलोपैड्स से भरा चौड़ा डेस्क, कोने में सटा बंक।

"रिलैक्स हो जाओ, प्राइवेट यिल्दिज," मैंने कहा, मेरी आवाज स्थिर लेकिन सालों के इस आउटपोस्ट कमांड करने से आई सत्ता से लिपटी हुई। वो थोड़ी ढीली पड़ी, उसकी ओलिव-टैन स्किन रोशनी में हल्की लाल हो गई। मैंने विपरीत कुर्सी की ओर इशारा किया। "इन्फर्मरी में तुम्हारे काम की शानदार बातें सुनी हैं। बैठो। चाय?"

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर
कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर

उसने सिर हिलाया, खुद को नरम लावण्य से नीचे उतारा, उसके हरेक हावभाव मीठे और गर्म जैसे बादलों से टूटती धूप। जैसे ही उसने कप उठाया, उसका चाँदी का कंगन चाँदनी पकड़ लिया, चमकता हुआ जैसे गुप्त संकेत। अफवाहें घूम रही थीं—घायल सिपाहियों को स्थिर करने वाले काँपते हाथों की फुसफुसाहट, उसके कोमल स्पर्श ने जहाँ अराजकता थी वहाँ शांति ला दी। लेकिन इससे ज्यादा था, वो चिंगारी जो मुझे खुद वहाँ अपने ट्रेनिंग हादसे से सूजी टखने के दौरान महसूस हुई थी।

"कैप्टन काया," वो नरम शुरू हुई, उसकी तुर्की लहजा मेरे नाम को रेशम की तरह लपेटते हुए, "आपने डिब्रीफ के लिए बुलाया?" उसकी आँखें मेरी मिलीं, एक धड़कन ज्यादा देर रुकीं, वो चुराई नजर मेरी छाती में कुछ प्राइमल जला दी। मैं आगे झुका, उसके सटीकता की तारीफ की, दबाव में उसकी अंतर्दृष्टि की। बातचीत बही, तनाव स्प्रिंग की तरह लपेटता हुआ। उसकी हर हँसी, गर्म और सच्ची, हर चाय का घूँट जो उसके भरे होंठों को अलग करता, मुझे गहरा खींचता। मैं देख सकता था उसमें—कर्तव्य और जिज्ञासा का मिश्रण, उसकी बॉडी लैंग्वेज कठोर से सूक्ष्म आमंत्रण में बदलती। हवा गाढ़ी हो गई, चार्ज हो गई अनकहे से: ये सिर्फ उसके स्किल्स के बारे में नहीं था। ये हमारे बारे में था, यहाँ, अभी।

तारीफ हमारे बीच ठंडी होती चाय की भाप की तरह लटकी रही, और मैं और सहन न कर सका। मैं उठा, दो डगों में जगह पार की, मेरा हाथ उसके जबड़े की गर्म वक्रता पर पहुँचा। उसकी साँस अटकी, वो शहद-भूरे आँखें फैलीं लेकिन पीछे न हटीं। "तुम मेरे दिमाग में घूम रही हो, आयलिन," मैंने बुदबुदाया, अंगूठा उसके निचले होंठ पर रेखा खींचता। वो काँपी, मीठी और गर्म, उसका पतला बदन मेरे स्पर्श में झुकता जैसे इस कमांड का इंतजार कर रहा हो।

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर
कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर

मैंने उसके ब्लाउज के बटन जानबूझकर धीमे खोले, हर बटन एक छोटी समर्पण। कपड़ा अलग हुआ, उसके 34B चुचियों का नरम उभार दिखा, निप्पल ठंडी हवा में पहले ही सख्त हो चुके। अब ऊपर से नंगी, वो वहाँ असुरक्षित लेकिन साहसी बैठी, उसकी ओलिव-टैन स्किन चाँदनी में चमकती जो उसके कंगन पर नाच रही थी। मेरी उंगलियाँ उसके गले से नीचे सरकीं, कॉलरबोन पर, एक चुची को नरम पकड़ा, अंगूठा चोटी पर घुमाया जब तक वो नरम सिसकी के साथ कमर तान न ली। "कैप्टन..." वो फुसफुसाई, आवाज में विनती और निमंत्रण का मिश्रण।

वो खड़ी हुई, स्कर्ट अभी भी कूल्हों से चिपकी, और मुझसे सटी, उसके हाथ मेरी छाती तलाशते। मैंने तब उसे चूमा, गहरा और दावा करते, उसकी जीभ पर चाय का स्वाद उसके प्राकृतिक मिठास से मिला। उसके उंगलियाँ मेरी शर्ट से छेड़छाड़ कर रही थीं, लेकिन मैंने गाइड किया, उसे बनती गर्मी महसूस कराई। हम डेस्क की ओर बढ़े, उसके नंगी चुचियाँ मेरी यूनिफॉर्म से रगड़तीं, मुझमें चिंगारियाँ भेजतीं। मैंने उसे किनारे पर उठाया, उसकी टांगें सहज ही फैलीं जब मेरा मुँह उसके गले पर पहुँचा, फिर नीचे, हर निप्पल पर ध्यान देते। वो कराही, उंगलियाँ मेरे बालों में उलझीं, उसका बदन मेरी सत्ता के नीचे जिंदा। कंगन चमका जब उसकी बाँह हिली, उसकी झुकती कृपा का प्रतीक। हर स्पर्श आग बढ़ाता, उसकी गर्मी मुझे लपेटती, और वादा करती।

उसकी स्कर्ट कमर के चारों ओर चढ़ गई, मैं और रोक न सका। गुर्राहट के साथ, मैंने उसे घुमाया, डेस्क पर झुकाया, उसका पतला बदन मेरे कमांड को परफेक्ट झुक गया। चाँदनी हम पर उमड़ी, उसका कंगन चमकता जब उसके हाथ किनारे पकड़े। मैंने खुद को आजाद किया, उसके प्रवेश पर सेट किया, उसका गीलापन मुझे अंदर बुलाता महसूस किया। पहले धीमे, मैंने गहराई तक धक्का दिया, उसकी गर्मी मखमल की आग की तरह मुझे लपेटी। वो सिसकी, पीछे धकेलती, उसकी मीठी प्रकृति उत्सुक प्रतिक्रिया में खिली।

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर
कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर

हर ताकतवर धक्का उसे आगे झकझोरता, उसके गहरे भूरे घुंघराले बाल लहराते, ओलिव-टैन स्किन पसीने की चमक से जगमगाती। मेरी पीछे से नजर नशे वाली—उसकी संकरी कमर कूल्हों पर फैलती जिन्हें मैंने मजबूती से पकड़ा, टांगें पैर की उँगलियों पर काँपतीं। "हाँ कैप्टन," वो साँस लेती, आवाज भारी, सिर घुमाकर वो चुराई नजर पकड़ी जो सब शुरू कर चुकी थी। मैं उसके ऊपर झुका, एक हाथ उसके बालों में उलझा, दूसरा आगे सरकाकर उसके क्लिट को छेड़ा, महसूस किया वो मेरे चारों ओर लयबद्ध सिकुड़ती।

डेस्क हम नीचे चरमराया, होलोपैड्स भुला दिए बिखर गए। उसके कराहने क्वार्टर भर दिए, गर्म और बिना रोक, बदन सुख बनाते सिकुड़ता। मैंने और जोर से चोदा, त्वचा की थप्पड़ गूँजी, मेरा अपना झड़ना कसता। वो पहले आई, जोर से काँपती, अंदरूनी दीवारें लहरों में धड़कतीं जो मुझे बेरहम निचोड़ रही थीं। मैं पीछे आया, गले की गर्जना के साथ गहराई में दफन, उसे भरता जब आँखों के पीछे तारे फूटे। हम जुड़े रहे, साँसें उखड़ीं, उसका कंगन मेरी बाँह से ठंडा सटता जब मैंने उसे करीब पकड़ा। वो पल खिंचा, दबंग लेकिन कोमल, उसकी समर्पण मेरी और चाहत को ईंधन देता।

लेकिन हम खत्म न हुए। जैसे उसके कंपन कम हुए, वो सीधी हुई, आँखें नई साहस से चमकतीं। रात जवान थी, और वो भी—मीठी आयलिन, अब मेरी गुप्त लौ।

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर
कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर

मैंने उसे नरम खींचा, उसे मेरा मुंह करना, हमारे बदन अभी भी तीव्रता से गुनगुनाते। उसकी स्कर्ट टेढ़ी लटक रही, लेकिन वो ऊपर से नंगी और चमकदार, चुचियाँ हर साँस पर उठतीं, निप्पल अभी भी हमारी उन्माद से सख्त। चाँदनी ने उसकी ओलिव-टैन स्किन को नहलाया, उसे दर्शन जैसा चमकाया। मैंने अब नरम चूमा, नमक और मिठास चखी, मेरे हाथ उसकी पीठ पर सांत्वना के गोले बनाते घूमे।

"वो... कमाल था," वो मेरे होंठों से बुदबुदाई, उसकी शहद-भूरे आँखें असुरक्षा से नरम। उसका कंगन मेरी कलाई से रगड़ा, बाहर की दुनिया की ठंडी याद। हम कुर्सी में डूबे साथ, वो मेरी गोद में सवार, पतला फ्रेम परफेक्ट फिट। मैंने उसके नंगी स्किन पर सुस्त पैटर्न बनाए, चुची की वक्रता से कमर की गहराई तक, छोटी कँपकँपी निकालते। वो हल्के हँसी, गर्म और सच्ची, मेरी गर्दन में नाक घिसती। "मुझे ये उम्मीद न थी, कैप्टन। लेकिन पछतावा नहीं।"

हास्य उसकी आवाज में चमका जब उसने जोड़ा, "हालाँकि डेस्क शायद कभी वैसा न रहे।" मैं हँसा, उसे करीब खींचा, हमारी बात कोमलता से बुनी—उसकी प्रतिक्रियाशीलता की तारीफें, साझा नजरें जो बहुत कुछ कहतीं। उसके उंगलियाँ मेरे बालों से खेलीं, बदन ढीला लेकिन चार्ज, वादा करता चिंगारी बुझी न। उस साँस लेने के अंतराल में, मैंने उसे विकसित होते देखा: मीठी रिक्रूट अब अपनी कामुकता गले लगाए, मेरी नजर के नीचे साहसी। चाय ठंडी हो चुकी, लेकिन हम बस गर्म हो रहे थे।

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर
कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर

उसके शब्दों ने मुझे फिर भड़का दिया। मैंने उसे बिना जोर उठाया, बंक पर ले गया जहाँ हम अंगों के उलझाव में गिरे। उसने मुझे नीचे धकेला, उसका पतला बदन अब कमांड लेता, आँखें मेरी पर लॉक वो नशे वाली नजर से। मुझ पर सवार, उसने मुझे अपनी चिकनी गर्मी में गाइड किया, कराह के साथ धँसती। नीचे से नजर मंत्रमुग्ध करने वाली—उसके गहरे भूरे घुंघराले उसके चेहरे को फ्रेम, ओलिव-टैन चुचियाँ सवारी करते नरम उछलतीं, कंगन चाँदनी में चमकता।

उसने लय सेट की, पहले धीमी और छेड़ने वाली, कूल्हे गोल घुमाते जो मुझे उसकी जांघें पकड़ने को मजबूर कर दिए। "एमिर," वो बिना रैंक मेरे नाम फुसफुसाई, साहसी और गर्म, आगे झुककर चुचियाँ मेरी छाती से रगड़तीं। मैंने ऊपर धक्का दिया उसे मिलाने, कमर पर हाथ गहराई गाइड करते, हर इंच का सिकुड़ना-छोड़ना महसूस। उसकी शहद-भूरे आँखें मेरी पकड़ीं, असुरक्षा शक्ति से मिली, उसकी मीठी प्रकृति अब सुलगती कमांड।

तेज वो गई, बदन लहरों की तरह उछलता, कराहें चीखों में बढ़ीं। मैं उठा, एक निप्पल मुँह में पकड़ा, जोर से चूसा जब वो पीछे तनी, उंगलियाँ मेरे कंधों में गड़ीं। बंक चरमराया, बेस की गुनगुनाहट हमारी निजी तूफान में भुला दी। उसका चरम बिजली की तरह आया, बदन ऐंठा, अंदरूनी मांसपेशियाँ जंगली फड़कतीं। मैंने उसे थोड़ी देर नीचे उलटा, उसके बाद के झटकों से चोदते हुए जब तक मेरा झड़ना न गिर पड़ा, गहराई में उंडेलता जब वो मेरा नाम कराही। हम चिपके रहे, थककर तृप्त, उसका कंगन मेरी स्किन पर तावीज।

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर
कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की चुराई नजर

शांत बाद में, उसका सिर मेरी छाती पर, मैंने बदलाव महसूस किया—वो अब मेरी थी, बदन और चिंगारी।

भोर की पहली रोशनी व्यूपोर्ट से चुपके आई जब हम कपड़े पहने, रात का जुनून साझा राज की तरह लटका। आयलिन ने ब्लाउज के बटन स्थिर हाथों से लगाए—अब कँपकी न—स्कर्ट सीधी की, यूनिफॉर्म फिर निखरी। वो मेरी आँख पकड़ी वो चुराई नजर से, अब आत्मविश्वास से लिपटी, कंगन चाँदनी को विदाई में झपकता।

"वो डिब्रीफ से ज्यादा था," वो गर्म मुस्कान से बोली, आखिरी चूमने करीब आकर। मैंने उसका चेहरा पकड़ा, अंगूठा गाल पर रगड़ा। "तुमने अपने स्किल्स साबित कर दिए, आयलिन। लेकिन एक डिप्लॉयमेंट आ रहा है। बेस से बाहर हाई-रिस्क ऑपरेशन। उन्हें हर एसेट की जरूरत... खासकर तुम्हारी, गहराई से।"

उसकी आँखें फैलीं, रोमांच और आशंका का मिश्रण चमका। उसने सिर हिलाया, मीठा संकल्प उसके चेहरे को सख्त किया। "मैं तैयार हूँ, कैप्टन। जो भी आप हुक्म दोगे।" दरवाजा सिसकारा खुला, और वो फिसल गई, क्वार्टर संभावनाओं से गूँजता छोड़। मैं डेस्क को घूरा, बिखरे होलोपैड्स हमारी आग के साक्षी। वो डिप्लॉयमेंट लटका, खतरे का साया वादा करता—और ज्यादा चुराई पल। ये उससे क्या मांगेगा? हमसे?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयलिन कैप्टन से कैसे चुदाई करवाती है?

चुराई नजर से शुरू होकर डेस्क पर झुककर पीछे से लेती है, फिर बंक पर सवार होकर सवारी करती है।

कहानी में सबसे हॉट सीन कौन सा?

डेस्क पर गहरे धक्कों और क्लिट छेड़ने वाला सीन, जहाँ आयलिन जोर से कराहती है।

आगे क्या होता है?

हाई-रिस्क मिशन में और चुराई पल, खतरे में गहरी बॉन्डिंग का वादा।

देखें1k
पसंद1k
शेयर1k
आयलिन की छुपी आग ने फर्ज़ का पर्दा जला दिया

Aylin Yildiz

मॉडल

इस श्रृंखला की अन्य कहानियाँ

कैप्टन के क्वार्टर में आयलिन की हॉट चुदाई | निषिद्ध सेक्स स्टोरी