अलेक्जेंड्रा की अखाड़े में प्रतिद्वंद्वी ज्वालाओं का टकराव
विजय का पसीना अखाड़े की छाया में प्रतिद्वंद्वी की निषिद्ध आग भड़काता है।
अलेक्जेंड्रा की गरजती लगामें: जंगली समर्पण
एपिसोड 2
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मॉस्को की भीड़ का गर्जन धीमा पड़ गया जब मैंने अलेक्जेंड्रा को घोड़ों के सामान के कमरे में कोने में धकेल दिया, उसकी बर्फीली नीली आँखें विजय से चमक रही थीं। उसके निष्कलंका गोरे चेहरे पर पसीना चमक रहा था, उसके राखी सुनहरे बाल सवारी से बिखरे हुए थे। 'तुम्हें लगता है एक जीत तुम्हें अछूत बना देती है, पेत्रोव?' मैंने गुर्राया। वह करीब आई, उसका पतला बदन मेरे से रगड़ खाया, होंठ चुनौती से मुड़े। हवा में करंट दौड़ गया। जो प्रतिद्वंद्विता से शुरू हुआ था, वो अब कुछ कच्चा, भस्म करने वाला बनने वाला था—कमरे की मद्धम रोशनी में चमड़े और विजय के बीच प्रतिद्वंद्वी ज्वालाएँ टकराने वालीं।
मॉस्को का भव्य घुड़सवारी अखाड़ा ड्रेसेज ट्रायल्स की ऊर्जा से धड़क रहा था, हवा में चमचमाते चमड़े, घोड़ों के पसीने और उत्सुकता की महक भरी हुई थी। मैं, दिमित्री वोल्कोव, ने बेदाग सवारी की थी, मेरा हवला हर सूक्ष्म इशारे पर मेरी इच्छा का विस्तार बनकर प्रतिक्रिया दे रहा था। लेकिन वो थी—अलेक्जेंड्रा पेत्रोव—जिसने स्पॉटलाइट चुरा ली। 5'9" लंबी और सुडौल, उसका लंबा पतला काया रिंग पर शालीन अनुग्रह से हावी हो गई। उसके राखी सुनहरे बाल, सीधे और बहुत लंबे, आखिरी पिरोएट में पीली झंडी की तरह लहराए, भीड़ तालियों से फट पड़ी।
मैं साइडलाइन्स से देख रहा था, जबड़ा सख्त। सालों से हम प्रतिद्वंद्वी थे, यूरोप भर के कॉम्पिटिशन्स में रास्ते टकराते, हर जीत निजी अपमान। आज उसने मुझे आधे अंक से हराया। जजों ने उसकी जीत की घोषणा की तो उसकी बर्फीली नीली आँखें अखाड़े के पार मेरी तरफ मिलीं, उसके भरे होंठों पर रहस्यमयी मुस्कान खेल रही। निष्कलंका गोरी त्वचा एड्रेनालाईन से लाल, वह शालीनता से उतरी, चेहरे से एक बिखरा लटकन झाड़ा।


मद्धम तालियाँ गूँज रही थीं जब मैं उसके पीछे निजी सामान कक्ष में पहुँचा, मेरे जूतों की ठक-ठक पत्थर के फर्श पर। वह पहले से वहाँ थी, अपना सैडल खोल रही, उसके टाइट सफेद ब्रेeches उसके संकरे कूल्हों और लंबी टांगों को चिपके लिपटे थे। 'बधाई हो, पेत्रोव,' मैंने दरवाजे के फ्रेम पर टेक लगाते हुए कहा, भुजाएँ क्रॉस करके। 'हालाँकि हम दोनों जानते हैं ये किस्मत थी।'
वह मुड़ी, वो चुभती आँखें मुझमें अटक गईं। 'किस्मत? वोल्कोव, आज तुमने किसान की तरह सवारी की। मान लो—तुम फिसल रहे हो।' उसकी आवाज शालीन थी, उस शालीन काट के साथ जो हमेशा मेरी रगों में उतर जाती। मैं करीब आया, मद्धम रोशनी सैडल्स और लगामों पर छायाएँ डाल रही। जगह उसके होने से छोटी लग रही, चार्ज्ड। 'फिसल रहा? मैं दिखाता हूँ फिसलना क्या है,' मैंने बुदबुदाया, नजर उसके गले की वक्रता पर गिरी, जहाँ काला जैकेट खुला लटक रहा था।
उसकी चुनौती हवा में धुएँ की तरह लटकी, और सोचने से पहले मैंने फासला मिटा दिया। मेरे हाथ उसके कूल्हों पर पहुँचे, उसे खींचकर अपने से सटा लिया, जैकेट के पतले कपड़े से उसके बदन की गर्मी महसूस की। अलेक्जेंड्रा पीछे नहीं हटी; उल्टे उसके उँगलियों ने मेरी शर्ट पकड़ ली, बर्फीली नीली आँखें प्रतिद्वंद्विता से ज्यादा तीव्र कुछ से काली पड़ गईं। 'साबित करो ना, तो,' उसने फुसफुसाया, उसकी साँस मेरे होंठों पर गर्म।


मैंने उसे जोर से चूमा, उसके पसीने के नमक और जीत की मिठास उसके जीभ पर चखी। उसने बराबर आग से जवाब दिया, उसकी शालीन मुद्रा कच्ची भूख में टूट गई। मेरी उँगलियों ने उसके जैकेट का जिपर खींचा, कंधों से उतार दिया, नीचे सादा सफेद स्पोर्ट्स ब्रा नजर आया, उसकी निष्कलंका गोरी त्वचा मद्धम रोशनी में चमक रही। एक झटके से मैंने उसके छोटे, पूर्णाकार 32B चुचे आजाद कर दिए, निप्पल ठंडी हवा में तुरंत सख्त हो गए। वो लाजवाब थे—चुचदार और संवेदनशील, उसकी तेज साँसों से ऊपर-नीचे हो रहे।
वह मेरे स्पर्श में तन गई जब मैंने उन्हें थामा, अँगूठे उन कसे हुए निप्पलों के चक्कर लगा रहे, उसके गले से नरम कराह निकला। उसके बहुत लंबे राखी सुनहरे बाल कंधों पर बिखर गए, सीधी लटकनें मद्धम रोशनी पकड़ते हुए जब उसने सिर पीछे झुकाया। मैं उसके गले पर चूमते चला, नाड़ी पर काटा, होंठों के नीचे उसकी दौड़ महसूस की। उसके हाथ मेरी छाती पर घूमे, उँगलियाँ बेचैन होकर मेरी शर्ट के बटन खोलीं, नाखून हल्के से मेरी त्वचा पर खरोंचे।
'भगवान, दिमित्री,' उसने साँस ली, उसकी शालीन आवाज अब भारी, रहस्यमयी किनारे बिखरते हुए। उसने अपना ऊपरी नंगा बदन मुझसे सटा दिया, वो सख्त निप्पल मेरी नंगी छाती पर रगड़ते, हम दोनों में चिंगारियाँ दौड़ातीं। सामान कक्ष की चमड़े की महक उसके हल्के परफ्यूम से मिली, दूर की तालियाँ भूली गर्जना। उसके सफेद ब्रेeches कूल्हों से चिपके थे, लेकिन मैं उसकी जाँघों के बीच से निकलती गर्मी महसूस कर रहा था जब वह मुझसे रगड़ रही, चिढ़ा रही, तनाव बढ़ा रही जब तक वो दर्द की हद न पहुँच गया।


वो रगड़ना मुझे बर्बाद कर गया। एक गुर्राहट के साथ मैंने उसे घुमाया, उसके निष्कलंका गोरे बदन को सामान कक्ष की खुरदुरी लकड़ी की दीवार से सटा दिया, उसके छोटे चुचे थोड़े चपटे हो गए जब उसने हाथ वहाँ टिकाए। उसके सफेद ब्रेeches झटके में नीचे आ गए, टखनों पर जमा हो गए अंडरवियर संग, उसके गांड के चिकने वक्र और लंबी पतली टांगों के बीच चिकना गर्म रस नजर आया। उसने उन्हें एक तरफ उछाल दिया, टाँगें फैलाईं, कंधे के ऊपर पीछे झाँकते हुए वो बर्फीली नीली आँखें आज्ञा और समर्पण से भरीं।
मैंने खुद को आजाद किया, सख्त और दर्द से भरा, उसके द्वार पर सेट किया। एक धक्के से मैं उसके स्वागत करने वाली गर्मी में गहराई तक दफन हो गया। अलेक्जेंड्रा हाँफी, उसके बहुत लंबे सीधे राखी सुनहरे बाल झटके से आगे झूल गए जब उसका बदन धक्के से हिला। अहसास बिजली जैसा था—तंग, गीला, मेरे चारों तरफ सिकुड़ता हुआ जैसे वो इसी के लिए बनी हो। मैंने उसके संकरे कूल्हों को पकड़ा, हर ताकतवर धक्के पर उसे पीछे खींचा, चमड़ी की चटख हवा में गूँजी चमड़े और सेक्स की महक के बीच।
वह पीछे धकेल रही, धक्का पर धक्का ले रही, उसकी शालीनता आदिम कराहों में बदल गई। 'जोर से, वोल्कोव,' उसने माँगा, आवाज एक सिसकी पर टूटी जब मैंने गहरा एंगल किया, वो जगह मारी जहाँ से उसके घुटने डगमगा गए। मैंने एक हाथ उसके बालों में लपेटा, हल्का खींचकर गर्दन तनवाई, उस गोरी त्वचा को मेरे होंठों के लिए ज्यादा खोला। उसके पीठ पर पसीने की बूँदें चमकीं, नीचे टपकतीं जब हमारी लय तेज हुई, उन्मादी और अटल। उसके अंदर की दीवारें फड़फड़ाईं, सिकुड़ीं, और मैंने महसूस किया उसका चरम ऊँचा हो रहा—उसका बदन तना, फिर मेरे चारों ओर टूटा लहरों में जो मुझे बेरहमी से निचोड़ रही।


मैंने रोका, उसके काँपने का मजा लिया, साँसें दीवार पर खुरदुरी। तभी जब वह थोड़ी झुक गई, मेरा नाम फुसफुसाते हुए जैसे विनती, तब मैंने छोड़ा, उसके अंदर गहराई से धड़कते हुए एक कराह के साथ जो हम दोनों में कंपकंपाई। हम वैसा ही जुड़े रहे, हाँफते हुए, भीड़ की तालियाँ दूर का गड़गड़ाहट। लेकिन ये तो बस चिंगारी थी; ज्वालाएँ अभी बाकी थीं।
मैं धीरे से बाहर निकला, उसे मेरी तरफ घुमाया, उसका ऊपरी नंगा बदन पसीने से चमक रहा। अलेक्जेंड्रा की बर्फीली नीली आँखें मेरी मिलीं, अब नरम, रहस्यमयी पर्दा हटकर ऐसी कमजोरी दिखाई जो मेरे सीने में कुछ मरोड़ गई। वह मुझमें झुकी, उसके छोटे 32B चुचे मेरी छाती से दबे, निप्पल अभी भी उन्माद से खड़े। मैंने उसका चेहरा थामा, इस बार कोमलता से चूमा, हमारी आग के अवशेष चखे।
हम कोने में साफ सैडल कंबलों के ढेर पर बैठ गए, उसके बहुत लंबे राखी सुनहरे बाल पीले हेलो की तरह बिखरे। उसकी निष्कलंका गोरी त्वचा पर कूल्हों पर मेरे उँगलियों के हल्के निशान, हमारे टकराव की चिन्ह। 'वो था... अप्रत्याशित,' उसने बुदबुदाया, अपनी उंगली से मेरी बाँह पर पैटर्न बनाते हुए, उसकी शालीन आवाज में हास्य घुला। मैं हँसा, उसे करीब खींचा, उसकी धड़कन मेरी से सटी महसूस की।


'बता तो सही। मैं गर्व करने आया था, पूजा करने नहीं।' वह हँसी, सच्ची आवाज जो उसके चेहरे को रोशन कर गई, प्रतिस्पर्धी किनारा भगाकर। हम लेटे रहे, बदन उलझे लेकिन अभी तृप्त, धीमी आवाजों में पुरानी और आने वाली सवारीयों पर बातें। उसका हाथ मेरी जाँघ पर बेपरवाह घूम रहा, बिना माँग के चिढ़ाता, जबकि मैं उसके कूल्हे की वक्रता सहलाता। दूर की तालियाँ बाहर की दुनिया याद दिला रही, लेकिन यहाँ, इस मद्धम सामान कक्ष में, वक्त सुस्ता रहा। फिर भी मैं उसकी आँखों में आग दोबारा सुलगती देख सकता था, वो शालीन भूख फिर जाग रही।
उसकी चिढ़ाने वाली स्पर्श ने मुझे फिर भड़का दिया। अलेक्जेंड्रा हिले, कंबलों पर मुझे पीठ के बल धकेला, उसका लंबा पतला बदन शालीन अधिकार से मेरे ऊपर सवार। वो बर्फीली नीली आँखें मेरी पकड़े रही जब उसने खुद को ऊपर सेट किया, मुझे फिर उसके चिकने गर्म रस में डाला। अहसास लाजवाब था—इस बार धीमा, गहरा, जब वह पूरी तरह नीचे उतरी, इंच-इंच मुझे घेरते हुए। उसकी निष्कलंका गोरी त्वचा गुलाबी लाल, बहुत लंबे सीधे राखी सुनहरे बाल पर्दे की तरह आगे झरते, मेरी छाती पर ब्रश करते।
उसने जानबूझकर लय से मुझे चोदा, हाथ मेरे कंधों पर टिकाए, संकरा कूल्हा सम्मोहक चक्करों में मुड़ता। हर ऊपर-नीचे हम दोनों से कराह निकालता, उसके छोटे 32B चुचे हल्के उछलते, निप्पल तने। मैंने उसके कूल्हों को पकड़ा, ऊपर धक्का देकर मिला, हर गोता लगाने पर उसे ज्यादा सिकुड़ते महसूस किया। 'दिमित्री,' वह हाँफी, सिर पीछे गिरा, गले की शालीन रेखा खोल दी। सामान कक्ष घूम गया—सैडल्स धुंधले, तालियाँ मिटतीं—जब सुख मेरे पेट के नीचे कुंडल बँधा।


उसकी गति तेज हुई, शालीन नियंत्रण हताश भूख में टूटा। मैं उठा, बाहें लपेटीं, हमारे मुँह गंदे चूमे में टकराए। एक हाथ बीच में फिसला, उँगलियाँ उसके सूजे क्लिट पर पहुँचीं, जोर से चक्कर लगाए। वह पहले टूटी, मेरे होंठों से चीखी, बदन लयबद्ध ऐंठनों में कंपा जो मुझे किनारे धकेल दिया। मैं जोर से आया, उसे भरते हुए जब वह नीचे रगड़ी, हर बूँद निचोड़ ली। हम चिपके रहे, साँसें मिलीं, दिल धड़के एक साथ। उस पल, प्रतिद्वंद्वी प्रेमी बन गया, प्रतियोगिता की ज्वालाएँ कुछ अटूट गढ़ दीं।
हम धीरे कपड़े पहने, आफ्टरग्लो में स्पर्श और मुस्कानें चुराते। अलेक्जेंड्रा ने जैकेट जिप किया, हरकतें फिर शालीन सुडौल लौट आईं, हालाँकि बर्फीली नीली आँखें नई गर्माहट से चमक रही। उसके बहुत लंबे राखी सुनहरे बाल ढीली पोनीटेल में बाँधे, निष्कलंका गोरी त्वचा अभी चमक रही। 'ये चीजें बदल देगा, वोल्कोव,' उसने धीरे कहा, ब्रेeches ठीक करते हुए।
मैंने सिर हिलाया, शर्ट के बटन करते। 'बेहतर के लिए।' जब वह सैडल उठाने लगी, मैंने जेब से सोने का लिफाफा निकाला—एक संरक्षक का न्योता मेरे निजी एस्टेट गाला पर। 'आओ। ऊँचे दाँव इंतजार कर रहे। खेल जहाँ जीत अंकों से ज्यादा मतलब रखे।' उसने लेते हुए उँगलियाँ मेरी छुईं, जिज्ञासा इच्छा के साथ झिलमिलाई।
बाहर भीड़ की तालियाँ उफान पर, उसे मंच पर बुला रही। वह दरवाजे पर रुकी, पीछे झाँककर रहस्यमयी मुस्कान दी। 'देखते हैं अगली बार कौन जोर से सवारी करेगा।' दरवाजा क्लिक बंद हुआ, मुझे उसके बदन की महक त्वचा पर और टकराने वाली ज्वालाओं का वादा छोड़कर।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अलेक्जेंड्रा की कहानी में क्या होता है?
मॉस्को अखाड़े में प्रतिद्वंद्वी दिमित्री के साथ अलेक्जेंड्रा की जीत के बाद जंगली चुदाई। दो राउंड सेक्स में तंग चूत और चुचियाँ का भोग।
कहानी में सेक्स कितना स्पष्ट है?
पूरी तरह स्पष्ट—चुचियाँ, निप्पल, चूत चोदना, धक्के, चरम सुख सब विस्तार से। कोई सेंसर नहीं।
ये कहानी किसे पढ़नी चाहिए?
20-30 साल के हिंदी वाले लड़कों को, जो घुड़सवारी वाली हॉट चुदाई एरोटिका पसंद करते हैं। ]





