अलेक्जेंड्रा का फैंटम निशान: घोड़े वाले का विद्रोह
तूफान की भयंकरता में, उसकी शालीन मुखौटा चूर-चूर हो गई, एक आत्मा नंगी हो गई जो बिजली जितनी जंगली।
अलेक्जेंड्रा की गरजती लगामें: जंगली समर्पण
एपिसोड 4
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बिजली गरजी जैसे देवताओं का अपना प्रकोप, जब अलेक्जेंड्रा और मैं आधी रात के तूफान में घुड़साल की ओर दौड़े। उसके राख-भूरा बाल जंगली लहरा रहे थे, बर्फ-नीली आँखें फैंटम के लिए चिंता से भरी हुईं, उसके बहुमूल्य घोड़े पर जो किसी भूली हुई क्रूरता से निशान वाला था। भीगकर हड्डी तक तर, उसकी शालीन पोशाक दूसरी खाल की तरह चिपकी हुई, लेकिन उसके स्पर्श में वो कच्ची कमजोरी थी जिसने मुझमें कुछ primal जगा दिया। उस बारिश और बिजली की कोड़े में, दीवारें ढह गईं, विद्रोह और चाहत में गढ़ी एक मिलन का वादा। गाला की चमकती लाइट्स दुनिया भर दूर लग रही थीं जब तूफान ने एस्टेट पर अपना प्रकोप छोड़ा। अलेक्जेंड्रा पेत्रोव ने मेरी बाँह पकड़ ली थी उसी पल जब स्टेबल हैंड फट पड़ा था फैंटम की चोट की खबर लेकर—एक डर से कटा गहरा घाव बाड़ से, खून कीचड़ में मिला हुआ। 'इवान,' उसने फुसफुसाया था, उसकी आवाज गपशप को चीरती हुई चाकू की तरह, 'अभी चलते हैं।' किसी ने उसका विरोध नहीं किया, खासकर मैं नहीं, वो घोड़े संभालने वाला जो सालों से उसके घोड़ों की देखभाल करता रहा, विशेषाधिकार की परछाइयों से उसे देखता। हम रात में कूद पड़े, बारिश चेहरों पर कोड़े मारती जब हम मैदान पार दौड़े। उसकी पोशाक, हाथीदांत रेशम का झरना, हवा में लहराई और फटी, लेकिन वो पागल औरत की तरह दौड़ी, उसकी लंबी टाँगें दूरी निगलतीं। मैं कदम मिलाए रखा, मेरी शर्ट सीने से चिपकी, दिल धड़का न सिर्फ दौड़ से बल्कि उसकी बर्फ-नीली आँखों की आग से। फैंटम उसके लिए सिर्फ घोड़ा नहीं था; वो एक भूतिया निशान था, किसी दर्द की याद जो उसने कभी नहीं बताई। घुड़साल के दरवाजे हमारे कंधों से धड़ाके से खुले, और वहाँ था वो—उसका काला घोड़ा, दर्द से उछलता, किनारा फटा हुआ। बिजली ऊपर फटी, घास बिखरी फर्श और...


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