अमिरा की वापसी उड़ान का हिसाब
बादलों के ऊपर, उसकी तीखी आजादी समर्पण के तूफान में चूर-चूर हो गई।
अमिरा का इंजन की गुनगुनाहट में निषिद्ध नजरों का समर्पण
एपिसोड 5
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मोनाको से दुबई लौटने वाली रेड-आई प्राइवेट जेट रात के अंधेरे में गुनगुनाती हुई उड़ रही थी, लेकिन नींद मेरे दिमाग में आखिरी चीज थी। अमिरा महमूद मेरे सामने पिछली केबिन में बैठी थी, उसके चटखारे लाल बाल धुंधले केबिन लाइट्स में चमक रहे थे, वो नीली आंखें मेरी आंखों में चुनौती के साथ जकड़ रही थीं जो मोनाको से भागने के बाद से ही सुलग रही थी। हम दोनों के बीच का तनाव एक लाइव वायर था, हर नजर से, हर हिलने-डुलने से चिंगारियां उड़ रही थीं। मुझे पता था आज रात, धरती से मीलों ऊपर, वो आखिरकार टूटेगी—या मैं उसे तोड़ दूंगा। प्राइवेट जेट के इंजन स्थिर लोरी गा रहे थे, लेकिन इससे पिछली केबिन में उमड़ते तूफान को शांत करने में कोई फायदा नहीं हुआ। अमिरा और मैंने जैसे ही चढ़े, ये अलग-थलग जगह हथिया ली थी, आगे के थोड़े से क्रू से दूर। मोनाको एक चक्रवात था—शोहरत, राज, चुराई हुई रातें—लेकिन अब, दुबई लौटने वाली इस रेड-आई पर, हम दोनों के बीच हवा में अधूरा काम चटक रहा था। वो मेरे सामने प्लश लेदर सीट पर लेटी हुई थी, उसके लंबे पैर क्रॉस किए हुए, काला रैप ड्रेस उसके घंटी आकार के कर्व्स को दूसरी खाल की तरह चिपकाए हुए। वो चटखारा चमकीला लाल बाल कंधों पर ढीली बीच की लहरों में लहरा रहे थे, वो चुभती नीली आंखें अब मुझे विद्रोह और भूख के मिश्रण से घूर रही थीं। मैंने अपना व्हिस्की का घूंट लिया, जलन को खुद को संभालने दिया। 'तुम दुनिया फतह करने की साजिश रच रही हो लग रही हो,' मैंने कहा, मेरी आवाज केबिन की अंतरंग गुनगुनाहट से मेल खाने के लिए धीमी। उसकी होंठ उसकी सिग्नेचर हाफ-स्माइल में मुड़े, तीखे और अटल। 'शायद कर रही हूं, डेमियन। या शायद बस ये तय कर रही हूं कि तुम खलल डालने लायक...


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