विदा की ईर्ष्या की ज्वालाओं का तूफान

ईर्ष्या एक कब्जे वाली कच्चे, पुनः हथियाने वाले जुनून का तूफान उभारती है।

वीड़ा की लाल बेलों की वंशानुगत हवस

एपिसोड 4

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विदा की ईर्ष्या की ज्वालाओं का तूफान

बारिश हमारी मास्टर बेडरूम की ऊँची खिड़कियों पर एक बदला लेने वाले भगवान की तरह जोरों से कोस रही थी, पानी की चादरें नीचे फैले विशाल दाख की बागों का नजारा धुंधला कर रही थीं। टस्कनी में तूफान हमेशा नाटकीय होता था, लेकिन आज रात ये मेरे अंदर उबलते गुस्से की आग को प्रतिबिंबित कर रहा था। मैं दरवाजे पर खड़ा था, मेरी शर्ट बगीचे के पार दौड़ते हुए सीने से भीगी चिपक रही थी, नजरें विदा पर जमी हुईं। वो किंग-साइज बेड पर सिकुड़ी हुई थी, उसके लंबे घुंघराले गहरे भूरे बाल कंधों पर मध्यरात्रि की तरह बह रहे थे, एक अकेले लैंप की झिलमिलाती रोशनी में। 19 साल की ये फारसी हसीना अपनी जैतूनी त्वचा और हेजल आँखों ने मुझे पूरी तरह जकड़ रखा था, उसका एथलेटिक स्लिम बदन एक पारदर्शी सफेद सिल्क रोब में लिपटा जो नीचे मीडियम चुचियों और संकरी कमर का इशारा कर रहा था। वो उस लानत वाली डायरी को—उसकी आंटी का कुख्यात अवशेष—हाथों में थामे थी, पहले तो मेरे आने का ध्यान ही नहीं दिया। उसका अंडाकार चेहरा, जो आमतौर पर इतना आजादखोर और साहसी होता था, अब पन्ने पलटते हुए एक रहस्यमयी चमक लिए हुए था। विदा बख्तियारी, मेरी जंगली दिल वाली प्रेमिका, जिसने मुझे इतालवी पहाड़ियों के बीच इस भंवर भरी रोमांस में घसीटा था। लेकिन आज रात ईर्ष्या मुझे नोच रही थी। मैंने पहले उसका लिविया के साथ फोन पर सुना था, हँसी बहुत घनिष्ठ, फुसफुसाहट बहुत लंबी। और अब ये डायरी—चौथा पन्ना उसकी आंटी के थ्रीसम कांड उजागर कर रहा था, उलझे बदनों की कहानियाँ जो मेरे खून को गर्म कर रही थीं। क्या विदा तुलना कर रही थी? कल्पना कर रही थी? बाहर तूफान गरज रहा था, बिजली मेरी धड़कन की तरह गड़गड़ा रही थी। आखिरकार उसने ऊपर देखा, वो हेजल आँखें आश्चर्य से फैलीं, फिर शरारती चमक...

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वीड़ा की लाल बेलों की वंशानुगत हवस

Vida Bakhtiari

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