लूसिया की प्लाजा रेकनिंग रिदम
संतों की छाया में वो अपना रिदम बिना किसी रोक के ले लेती है।
प्लाज़ा के हुक्म: लूसिया की छिपी नंगाई
एपिसोड 6
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प्लाजा डे आर्मस सैंटियागो की शाम की शांत ऊर्जा से धड़क रहा था, फव्वारे सुनहरी रोशनी की लड़ियों के नीचे कोबलस्टोन को राज़ फुसफुसा रहे थे। हवा में पास के ठेलों से एम्पानादास की हल्की महक आ रही थी, जो धुंधलाते अंधेरे के साथ ठंडी सांस की तरह लिपट रही थी, ठीक किसी पुराने आशिक की साँसों जैसी। मैं भीड़ के किनारे खड़ा था, मेरी निगाहें लूसिया वर्गास पर टिकी हुई थीं जो अपने स्ट्रीम के लिए डांस कर रही थी, उसका बर्फ जैसा पिक्सी कट चाँदनी के हलो की तरह चमक रहा था। उसके कूल्हों का हर झुकाव रोशनी को अपनी तरफ खींच रहा था, उसकी हरकतें इतनी तरल और सम्मोहक थीं कि मेरे गले में कुछ अटक सा गया, नाम न ले पाने लायक कुछ। वो चुंबकीय थी, उसका नाजुक कद सफेद बहती स्कर्ट और छोटी टॉप में लिपटा हुआ, जो उसकी हल्की तनी हुई त्वचा को बस इतना छू रही थी कि ललचाए बिना न रहे। कपड़ा उसके शरीर से हर घुमाव पर सरसराता था, नीचे की नरमाहट का इशारा करता हुआ, और मैं खुद को सोचता पाता कि अगर मेरी उँगलियाँ उस गर्म त्वचा को छुएँ तो कैसा लगेगा—ख्याल आते ही मेरी रीढ़ से सिहरन दौड़ गई, भीड़ की गर्माहट के बावजूद। पच्चीस साल की उम्र में वो ऐसे चलती थी जैसे दुनिया को अपनी परिक्रमा में खींच लेने का हुनर जानती हो—पास से गुजरने वालों को दोस्ताना मुस्कान, और जोश भरे चक्कर जिनमें उसकी गहरी भूरी आँखें शरारत से चमक उठतीं। वो आँखें इतनी गहरी और बोलती हुई, आसपास के चेहरों को टटोल रही थीं, और एक पल के लिए मुझे लगा जैसे वो मुझे देख रही हो, जैसे मेरी निगाहों का बोझ उसे किसी सहलाहट की तरह महसूस हो रहा हो। ट्राइपॉड पर रखा फोन सब कुछ कैप्चर कर रहा था, उसकी हँसी स्पीकर...


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