लियाना का गली में समर्पण
खुफिया जानकारी की फुसफुसाहट ग्रैफिटी से सनी दीवारों पर कराहों में घुल जाती है।
रेशम की छायाएँ: लियाना की निषिद्ध भूखें
एपिसोड 3
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गली से बारिश भिगी कचरे और दूर के स्ट्रीट फूड की बदबू आ रही थी, लेकिन जब लियाना मद्धम रोशनी में कदम रखी, तो सब कुछ तेज हो गया। उसकी पतली कमर को फिट ब्लैक ब्लाउज और पेंसिल स्कर्ट चिपक रही थी, वो अपनी चौड़ी भूरी आंखों से परछाइयों को स्कैन कर रही थी, शर्मीली लेकिन दृढ़। मैं ग्रैफिटी वाली दीवार से टिका था, दिल धड़क रहा था। ये चोरी के गिरोह पर खुफिया जानकारी का मामला था, लेकिन उसके होंठों का फैलना, सांस की तेजी, कुछ ज्यादा खतरनाक का वादा कर रही थी। मैं उस तंग चाइनाटाउन गली में घंटों से इंतजार कर रहा था, वो जगह जहां मुख्य सड़क की नीली रोशनी मुश्किल से रिसती थी, ग्रैफिटी वाली दीवारों को बीमार गुलाबी और नीले रंगों से रंग रही थी। हवा में पास की स्टॉल से तले नूडल्स की खुशबू और कल की बारिश की हल्की सड़ांध भरी हुई थी। मेरी पीठ ठंडी ईंटों से सटी हुई, मैंने फोन फिर चेक किया—उसका कोई मैसेज नहीं। लियाना नूरुद्दीन। नाम ही कुछ हलचल पैदा कर देता था, अंडरग्राउंड में फुसफुसाया जाने वाला राज। फिर वो गली के मुंह पर दिखी, पहले सिल्हूट, पतली और हिचकिचाती, उसके लंबे भूरे बाल किसी भटकी किरण को पकड़ रहे थे। उसने क्रीज ब्लैक ब्लाउज पहना था जो उसके छोटे कद को चिपक रहा था और पेंसिल स्कर्ट जो घुटनों के ठीक ऊपर खत्म हो रही थी, प्रोफेशनल लेकिन कुछ कमजोर सा एहसास। उसकी भूरी आंखें बाएं-दाएं घूमीं फिर मेरी तरफ अटक गईं। शर्मीली लग रही थीं, लेकिन नीचे आग थी। "अमीर?" उसकी आवाज नरम थी, हल्का एक्सेंट, जकार्ता की गलियों का लहजा लिए। मैंने सिर हिलाया, दीवार से धकेला। "हां, यहीं हूं। तुम लियाना?" वो करीब आई, हील्स असमान पेवमेंट पर खटखटा रही थीं, इतनी करीब कि उसकी परफ्यूम की खुशबू आ गई—चमेली, हल्की और...


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