मिया की कांपती चढ़ाई की ऑडिशन
आईने नुमा परछाइयों में, दर्द उन्मादी समर्पण में बदल जाता है
मिया की घूमती लपटें: छिपे समर्पण की ज्वाला
एपिसोड 1
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वैनगार्ड बालेट स्टूडियो आधी रात के अंधेरे में चुपचाप खड़ा था, इसकी दीवारें अनगिनत आईनों से सजी हुईं जो ऊपर वाली एकमात्र लाइट की हर झलक को पकड़ रही थीं। मैं, विक्टर केन, बीच में खड़ा था, भुजाएँ क्रॉस की हुईं, मेरी सख्त कोरियोग्राफर की साख मेरे आगे छाया की तरह चल रही थी। हवा में पॉलिश की हुई लकड़ी और पहले की क्लासों से हल्की पसीने की महक भरी हुई थी, एक मंदिर जहाँ सपने गढ़े या चूर-चूर किए जाते थे। आज रात मिया विल्सन की बारी थी उस भट्टी का सामना करने की। 26 साल की ये ऑस्ट्रेलियाई फायरब्रांड सिडनी के स्टूडियोज से मेरे दर पर खरोंचते-खरोंचते पहुँची थी, उसका रिज्यूमे कच्चे जज्बे की फुसफुसाहट करता था जो उसके पतले 5'6" कद से मैच करता था। काले घुंघराले लंबे बाल सख्त बन में बाँधे, नीले आँखें टूटे शीशे जितनी तेज, जैतूनी रंग की त्वचा लाइट्स के नीचे चमक रही— वो नियंत्रित गुस्से की मूरत थी, मीडियम ब्रेस्ट्स उसके काले लेगिंग्स पर दबे हुए, पैर गुलाबी टाइट्स में अनंत लग रहे। वो ठीक तय वक्त पर दरवाजा धड़ाके से खोलकर अंदर घुसी, साँसें स्थिर尽管 उसके बाएँ पैर पर हल्की ठिठक जो मैंने नोटिस की। छिपा हुआ टखने का दर्द, मैंने अंदाज लगाया, उसके बाएँ पैर को हल्का तरजीह देने से। लेकिन मिया ड्रिवन थी, महत्वाकांक्षी उसके कोर तक, और वो इसे दिखाने ना देती। 'मिस्टर केन,' उसने कहा, आवाज में ऑस्ट्रेलियाई लहजा घुला, एकदम सही कर्टसी में झुकते हुए। 'डांस करने को तैयार।' मैंने सिर हिलाया, बार की ओर इशारा किया। आईने उसे हर एंगल से रिफ्लेक्ट कर रहे थे, उसकी हिम्मत को एक फौज में बदलते हुए। जैसे ही मेरे टैबलेट से पियानो के नोट्स— एक सिहरन भरा अदाजियो— जगह भरने लगे, वो शुरू हुई। उसका बदन मुड़ा, पतली टांगें हवा को सटीक काटतीं, चोट के बावजूद। मैं...


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