देवी के कूल्हे गुप्त रस्मों के आगे झुकते हैं

रस्म की छाया में छिपी, उसका शरीर निषिद्ध लयों में जागृत होता है

पवित्र पर्दों के पीछे देवी की चुनी धड़कन

एपिसोड 3

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देवी के कूल्हे गुप्त रस्मों के आगे झुकते हैं
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कक्ष की हवा अगरबत्ती से भरी गाढ़ी थी, पवित्र धुंध जो नीचे बिछे बुने हुए चटाइयों के किनारों को धुंधला कर देती थी, चमेली और प्राचीन चंदन की सुगंध मेरी त्वचा पर चिपक गई जैसे प्रेमी की सांस, पुरानी रस्मों की यादें जगाती हुई। देवी मेरे सामने खड़ी थी, उसकी गर्म कारमेल रंगत तेल के दीयों की झिलमिलाती रोशनी में चमक रही थी, सुनहरी रोशनी उसके शरीर की हल्की चमक पर खेल रही थी, हर सुंदर वक्र को उभारते हुए जैसे आग की लपटें खुद उसकी शक्ल की पूजा कर रही हों। उसके लंबे काले बाल जो साइड-स्वेप्ट कर्टन बैंग्स के साथ उसके हंसमुख चेहरे को फ्रेम करते थे, सांस के साथ हल्के झूल रहे थे, लटें रोशनी पकड़ रही थीं जैसे आधी रात के रेशमी धागे। वह 23 की थी, इंडोनेशियन शालीनता का प्रतीक, 5'6" की स्लिम टोन्ड काया वाली, मीडियम ब्रेस्ट्स जो हर सांस के साथ हल्के उभरते थे, उनकी नरम ऊपर-नीचे मेरी नजर को खींचते हुए, एक सम्मोहक लय जो मेरी रगों में तेज हो रही धड़कन की गूंज थी। मैं, आई मेड सुदीरा, उसे यहां गहरी तैयारी के लिए लाया था, एक रस्म कक्ष जो कारीगर पूजा के लिए समर्पित था, दीवारें फीकी टेपेस्ट्री से सजी हुईं जो आनंद में खोई नर्तकियों को दर्शाती थीं, हवा अनकही भक्तियों के बोझ से गुनगुना रही थी। उसके गहरे भूरे आंखें उस दोस्ताना जिज्ञासा से चमक रही थीं, लेकिन आज रात वे कुछ और रखती थीं—एक शांत उत्सुकता जो मेरे सीने की कंपन को प्रतिबिंबित करती थी, हमारा साझा राज अगरबत्ती के धुएं की तरह हम中间 मंडरा रहा था। जब मैंने रस्म की पर्दा उठाया, रेशम उतना ही नरम जितना उसकी त्वचा, मेरी उंगलियों पर ठंडा और फिसलन भरा, मैंने हम中间 की खिंचाव महसूस की, एक अदृश्य धागा जो हमारे शरीरों को करीब खींच रहा था, मेरा दिल इस...

देवी के कूल्हे गुप्त रस्मों के आगे झुकते हैं
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पवित्र पर्दों के पीछे देवी की चुनी धड़कन

Dewi Anggraini

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