देवी की पायल की गूंज छाया में

मंदिर की पर्दे वाली खामोशी में, उसकी पायल की खनक नृत्य को इच्छा में बहका देती है।

पवित्र पर्दों के पीछे देवी की चुनी धड़कन

एपिसोड 2

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देवी की नई पायल की कोमल खनक हवा में लहराई रही थी जैसे कोई फुसफुसाती हुई वादा, जब वो बालिनी नृत्य की रिहर्सल के दौरान पर्दे वाले मंदिर के कक्ष में घूम रही थी। वो आवाज नम स्थिरता में बुनी गई, हर बारीक खनन प्राचीन पत्थर की दीवारों से गूंजी जो गौमेर रेशम से ढकी हुई थीं, जिसमें चमेली और चंदन की अगरबत्ती की खुशबू के संकेत थे जो माहौल को और गाढ़ा बना रही थी। मैं छायाओं से देख रहा था, नक्काशीदार लकड़ी के पर्दे के पीछे छिपा हुआ, मेरा नाड़ी ताल तेज हो गया उसके पतले टोन्ड बॉडी की तरल सुंदरता पर, उसके लंबे काले बालों के साइड-स्वेप्ट कर्टन बैंग्स का हर सटीक कदम के साथ लहराना, कंधों को छूते हुए जैसे आधी रात का रेशम हल्की हवा से हिल रहा हो। उसके हाव-भाव गति में कविता थे—बाहें मंदिर की फ्रिज़ की तरह जीवंत होकर मुड़तीं, उंगलियां असंभव नाजुकता से फैलतीं, कूल्हे लहराते हुए द्वीप के प्राचीन मिथकों की गूंज में। उसकी गर्म कारमेल त्वचा ऊपर जालीदार खिड़कियों से छनती रोशनी में चमक रही थी, उसके रूप पर सुनहरी चमक बिखेरते हुए, उसे लगभग आध्यात्मिक बना देती, बाली की पवित्र नारीत्व की जीवंत मूर्ति। गहरी भूरी आंखें केंद्रित फिर भी शरारती, वो कभी-कभी छायाओं की तरफ झिलमिलातीं जहां मैं छिपा था, जैसे मेरी नजर महसूस कर रही हो, मेरी रीढ़ में एक रोमांच दौड़ाते हुए। वो 23 की थी, जीवंत, हंसमुख, और पूरी तरह मोहक उसके पारंपरिक सरोंग और केबाया में, कपड़ा इतना चिपकता कि नीचे की वक्रताओं का संकेत देता—उसके मीडियम ब्रेस्ट्स का कोमल उभार हर नियंत्रित सांस के साथ उठता, कमर का संकरा बंधन टोन्ड कूल्हों पर फैलता जो ताकत और समर्पण दोनों का वादा करता। मैंने उसे अनगिनत बार रिहर्सल करते देखा था, लेकिन आज रात हवा में अनकही तनाव की गूंज थी, मेरे विचार...

देवी की पायल की गूंज छाया में
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पवित्र पर्दों के पीछे देवी की चुनी धड़कन

Dewi Anggraini

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