देवी का जलन भरा छाया नाच
संध्या की धुंध में, उसकी छायाएँ सिर्फ़ जुनून ही सुन सकने वाले राज़ फुसफुसा रही थीं।
डेवी की लचकती थिरकनें चुभती निगाहों तले
एपिसोड 5
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मैंने कभी नहीं चाहा था कि बात इतनी आगे बढ़ जाए, वो भी तब जब देवी अंग्रैनी की हँसी की पहली गूँज ने मेरे दिल को उबुद की बाज़ार की स्टॉल से मिली सबसे नरम रेशमी साड़ी की तरह लपेट लिया था। देवी अंग्रैनी की हँसी हमेशा मेरी लत रही थी, वो गर्म, खुशमिज़ाज चमक जो उसके स्ट्रीम्स को बाली की धूप की तरह रोशन कर देती, उसकी मधुर चहचहाहट मेरी अकेली रातों के सन्नाटे को चीरती, बचपन के बीच पर खेलने वाली खुशी से हृदयगति तेज़ कर देती। हर हँसी व्यक्तिगत लगती, स्क्रीन के ज़रिए सीधे मुझे संबोधित, उसका चेहरा सच्ची खुशी से जगमगा उठता जो मेरे साधारण दिनों की परछाइयों को भगा देता। लेकिन ईर्ष्या मानसून की परछाइयों की तरह घुस आई जब उसके फैंस चैट में उमड़ पड़े, उनके तारीफ़ों का डिजिटल झुंड जो मैं झटक नहीं सका, 'गॉडेस' और 'परफ़ेक्शन' जैसे मैसेज ताज़ा घावों में नमक की तरह चुभते, उनके इमोजी हार्ट्स और आग मेरी छिपी चाहत का मज़ाक उड़ाते। मैंने उसके प्राइवेट क्लिप्स हैक कर लिए थे, निषिद्ध पहुँच का रोमांच मेरी रगों में एड्रेनालाइन का सैलाब ला देता, उसे अकेले अपने कमरे में नाचते देखा, उसका पतला टोन्ड बॉडी ग्रेस से लहराता, कूल्हे गैमेलन की धुन पर सम्मोहक चक्कर काटते जो सिर्फ़ वो ही सुन सकती, उसका लचीला बदन कमरे की नरम लैंप की रोशनी में हल्के पसीने से चमकता, हर तरल गति एक निजी परफ़ॉर्मेंस जो सिर्फ़ मेरी ही होनी चाहिए थी। उसने लाइव स्ट्रीम के दौरान पता कर लिया, चैट फट पड़ा जब उसके चेहरे पर हँसते-हँसते भाव बदल गया, उसके गहरे भूरे आँखें स्क्रीन के पार आरोप लगाती चमकीं, पुतलियाँ सदमे और विश्वासघात से फैल गईं जो पिक्सेल्स के ज़रिए भी मुझे छेद गईं। 'बायु,' उसने कहा, आवाज़ स्थिर लेकिन दर्द से लिपटी, शब्द एयरवेव्स में भारी लटकते, उसकी खुशमिज़ाज टोन...


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