डाओ का लॉकेट: खुला प्रलोभन
लेस के पर्दों के बीच लाल लॉकेट निषिद्ध गर्मी से धड़कता है
डाओ का लाल लॉकेट: मखमली समर्पण
एपिसोड 1
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मैं पुरानी लिंगरी की दुकान में कदम रखा, हवा पुराने मखमल की खुशबू और हल्की चमेली के इत्र से भरी हुई। जगह लेस और रेशम का खजाना थी, पुरानी झूमरों की मद्धम रोशनी से जगमगाती जो पॉलिश की लकड़ी के फर्श पर सुनहरी चमक बिखेरती। शेल्फ कोर्सेट्स, गार्टर्स और नाजुक केमाइज के बोझ तले कराह रहे थे, हर टुकड़ा छिपी हुई आगो के वादे फुसफुसा रहा। ये वैसी दुकान थी जहां राज बिकते भी थे और छिपाए भी जाते, भारी ब्रोकेड पर्दों की परछाइयों में दबे हुए। काउंटर के पीछे डाओ मॉन्गकोल खड़ी थी, 25 साल की थाई हसीना लंबे लहराते भूरे बालों के साथ जो रात की नदी की तरह उसकी पीठ पर बह रहे। नरम टैन वाली त्वचा मद्धम रोशनी में चमक रही, अंडाकार चेहरा उन गहरे भूरे आंखों से घिरा जो सपनीली, रोमांटिक गहराई रखती। 5'6" की स्लिम, मीडियम बस्ट और एथलेटिक पतली काया वाले ग्रेसफुल स्विंग से हिल रही जबकि वो भूले हुए ताबीजों के दराज का इन्वेंटरी ले रही। वो एथेरियल आकर्षण की मिसाल थी, उसकी मौजूदगी मुझे मक्खी की तरह आग की लपटों की ओर खींच रही। मैं एलियास ब्लैकवुड था, एक ऐसा आदमी जो कमरे पर काबू करना जानता, चौड़े कंधे दरवाजे को भर रहे, गहरी आंखें स्कैन कर रही जो मैं सच में ढूंढ रहा—बस लेस नहीं, सरेंडर। मुझे इस दुकान के इंटीमेट फिटिंग्स की फुसफुसाहट सुनने को मिली थी, और डाओ ही वजह थी जिसने मुझे चुना। जैसे ही उसने दराज से लाल लॉकेट निकाला, उसका सतह ताजा खून की तरह चमक रही, उसके उंगलियां थोड़ी कांप गईं। वो रुकी, उसे रोशनी में उठाया, भरे होंठ आश्चर्य से खुल गए। लॉकेट ने उसे सम्मोहित सा कर दिया, छोटा सा कुंडी अनकही प्रलोभनों का वादा कर रही। हमारी नजरें कमरे के आर-पार मिलीं। उसकी आंखें फैल गईं, गला लाल हो गया, सपनीली...


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