जूलिया के ग्रीनहाउस की शक्ति की फसल
फूलते ट्यूलिप्स के बीच, विद्रोह कच्चे समर्पण में खिलता है
जूलिया की जादुई ट्यूलिप भूलभुलैया: समर्पण का जाल
एपिसोड 2
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दोपहर की धूप मेरे ग्रीनहाउस में चमकदार ट्यूलिप्स की कतारों से छनकर आई, कांच की दीवारों पर लाल, गुलाबी और पीले रंगों का रंगीन खेल बिखेरते हुए। अगले दरवाजे पर जूलिया जानसेन का टी हाउस जिंदगी से भरा था, उसकी मनमौजी हंसी पर्यटकों को मक्खियों की तरह आकर्षित कर रही थी। मैं, एलियास वैन डर बर्ग, ने यह ट्यूलिप साम्राज्य खाली हाथों से बनाया था, हर बल्ब को अपनी खुरदुरी हाथों और अंतहीन धैर्य से पाला था। लेकिन जूलिया, वो जादुई डच वixen जिसके हल्के भूरे, थोड़े लहराते लंबे बाल जंगली नदी की तरह बहते थे, मेरे ग्राहकों को लुभा रही थी। उसकी गोरी त्वचा रोशनी में चमक रही थी, हरी आंखें शरारत से जगमगा रही थीं, उसका पतला 5'6" कद पुरुषों के सिर घुमाने वाली अदा से हिल रहा था। वो एक साधारण सनड्रेस पहने थी जो उसके अंडाकार चेहरे और मध्यम स्तनों को बस इतना ही जकड़ रही थी कि ललचाए, उसकी संकरी कमर उसके एथलेटिक पतले बदन को उभार रही थी।
मैं अपने ग्रीनहाउस की छाया से देख रहा था जब एक और ग्रुप डच पर्यटकों, जिन्हें मैंने सुबह अपने खेतों में घुमाया था, उसके टी हाउस में घुस गया। उसकी आवाज, हल्की और जादुई, जड़ी-बूटियों के स्वादिष्ट पेय और स्थानीय कथाओं का वादा कर रही थी। मेरा खून खौल रहा था। कैसे हिम्मत करती है मेरी फसल चुराने की? हवा फूलते ट्यूलिप्स की मीठी, मिट्टी वाली खुशबू से भरी थी, नमी मेरी त्वचा से चिपकी हुई प्रेमी के पसीने की तरह। मैंने मुट्ठियां भींच लीं, नाखूनों के नीचे खुरदुरी मिट्टी महसूस करते हुए। जूलिया कोई मासूम फूल नहीं थी; वो सायरन थी, मनमौजी लेकिन सोची-समझी, उसके पतली टांगें चाय के कप सर्व करते हुए शानदार तरीके से पार हो रही थीं। मैं कल्पना कर रहा था वो टांगें मेरे चारों ओर लिपटी हुईं, मेरी प्रभुत्व के नीचे उसका अनिच्छुक समर्पण। तनाव हफ्तों से बढ़ रहा था—विभाजक बाड़ के पार चुराई नजरें, हमारी आंखें मिलने पर उसके छेड़ने वाले मुस्कान। आज, मैं और बर्दाश्त न कर सका। उसके टी हाउस की ओर धड़कते दिल के साथ तूफान की तरह बढ़ा, धार्मिक क्रोध में लिपटा हुआ निषिद्ध इच्छा से। दरवाजे की घंटी ने मेरी फूटती गुस्से की घोषणा की जब मैं अंदर घुसा, अपना बदन और बिजनेस दोनों दावा करने को तैयार।


टी हाउस का दरवाजा मेरे पीछे पटककर बंद हुआ, नाजुक घंटी का स्वर बेसुरा कर्कश हो गया। सिर घूमे—कैमोमाइल के आधे पिए कपों वाले पर्यटक बातचीत के बीच जम गए। वहां वो थी, जूलिया, जंगली फूलों से सजी लकड़ी की काउंटर के पीछे, उसकी हरी आंखें आश्चर्य से फैलीं फिर विद्रोह की संकरी हो गईं। 'एलियास वैन डर बर्ग,' उसने कहा, उसकी आवाज में वो मनमौजी किनारा लिए धुनदार लय, 'इस नाटकीय एंट्री का क्या कारण? चाय पीने आए हो, या बस घूरने?'
मैं आगे बढ़ा, मेरे जूतों की थाप चमकदार फर्श पर गूंजी, बुदबुदाहटों को नजरअंदाज करते हुए। 'तुम्हें बखूबी पता है मैं यहां क्यों हूं, जूलिया। अपनी चालाकियों से मेरे पर्यटकों को लुभा रही हो। अगले दरवाजे के वो खेत मेरे हैं—मेरे ट्यूलिप्स, मेरी कहानियां। तुम मेरी फसल चुरा रही हो, एक-एक जादुई मुस्कान से।' मेरी छाती फूल रही थी, गुस्सा नसों में गर्म लहर की तरह उफान मार रहा था, लेकिन उसके नीचे कुछ और गहरा हिल रहा था। उसकी गोरी त्वचा थोड़ी लाल हो गई, अंडाकार चेहरा मेरी नजरों से मिलने को ऊपर झुका, लंबे हल्के भूरे लहराते बाल उसके चारों ओर हेलो की तरह। वो पतली पूर्णता थी, 5'6" लालच का टुकड़ा उस सनड्रेस में, मध्यम स्तन हर सांस के साथ ऊपर उठते।


वो हंसी, घंटियों की झंकार जैसी लेकिन कांटों से लिपटी। 'चुराना? एलियास, वो बड़े हो चुके हैं। वो दृश्य और बेहतर संगति वाले टी हाउस को चुनते हैं। तुम्हारा ग्रीनहाउस तो बस मिट्टी और पसीना है—कम ही रोमांटिक।' पर्यटक असहज होकर हिले, लेकिन वो अपनी जगह पर डटी रही, कूल्हों पर हाथ रखे, हरी आंखें चमकतीं। मैं करीब आया, उसकी जगह पर कब्जा जमाते हुए, उसकी खुशबू सूंघते हुए—लैवेंडर और मिट्टी। 'रोमांटिक? यही बेचती हो? झूठी मनमौजियां मेरे बिजनेस को लूटने के लिए?' हमारे चेहरे इंचों के फासले पर, उसकी सांस तेज हो गई, होंठ फैल गए। हवा में चिंगारी उड़ी, तनाव स्प्रिंग की तरह लपेटा। मैं उसके गले में धड़कन देख सकता था, उसके पतले बदन से निकलती गर्मी महसूस कर सकता था।
'वो पर्यटक सुबह मेरे खेत में थे,' मैंने गरजकर कहा, आवाज इतनी धीमी कि सिर्फ वो सुन सके। 'अब यहां हैं, तुम्हारी जादूगरी से मोहित।' जूलिया की मनमौजी दिखावा टूटा, उसकी आंखों में अनिच्छुक भूख चमकी। 'शायद वो ट्यूलिप्स से ज्यादा चाहते हों, एलियास। शायद वो... शक्ति चाहते हों।' उसके शब्द लटके, उकसाने वाले। मेरा हाथ सरकने को बेचैन, उसे पकड़कर खींच लेने को। पर्यटक खुद को माफ करने लगे, तूफान भांपते हुए। 'ये खत्म नहीं हुआ,' मैंने फुसफुसाते हुए उसकी कलाई पकड़ी। वो पीछे खींची लेकिन चीखी नहीं—उसका बदन धोखा दे रहा था, थोड़ा झुककर। 'साबित करो,' उसने सांसें फूलते हुए चुनौती दी। बस यही। मैंने उसे मेरे ग्रीनहाउस की ओर जाने वाले पिछवाड़े के दरवाजे की ओर खींचा, उसके विरोध आधे-अधूरे, बहस कुछ primal में बदल गई। विभाजक बाड़ बस कदमों दूर थी, ट्यूलिप्स हमारी टक्कर के गवाह बनने को बेताब।


मैंने जूलिया को पिछवाड़े के दरवाजे से ग्रीनहाउस में घसीटा, नम हवा ने हमें प्रेमी के आलिंगन की तरह लपेट लिया। ट्यूलिप्स हम चारों ओर ऊंचे कतारों में खड़े थे, पंखुड़ियां हमारी टांगों को छूतीं जब मैंने उसे मजबूत वर्कबेंच से सटा दिया, मेरा बदन उसके पतले फ्रेम में दबा। 'सोचती हो चिढ़ा सकती हो और ले सकती हो बिना सजा के?' मैंने गरजकर कहा, मेरे हाथ उसके सनड्रेस पर ऊपर सरकें, एक ही खुरदुरे धक्के से सिर के ऊपर उतार दिया। वो उसके पैरों के पास जमा हो गई, उसे ऊपर से नंगा छोड़ दिया, उसके मध्यम स्तन नंगे, निप्पल्स गर्म हवा में सख्त होते।
जूलिया हांफी, हरी आंखें अनिच्छुकता और लालच के मिश्रण से फैलीं। 'एलियास, रुको—ये पागलपन है,' उसने फुसफुसाया, लेकिन उसकी गोरी त्वचा और गहरी लाल हो गई, अंडाकार चेहरा मुंह फेर लिया भले ही बदन मेरी ओर मुड़ा। मैंने उसके स्तनों को थामा, अंगूठे उन चुने हुए निप्पल्स के चारों ओर घुमाए, मेरी छुअन में उन्हें कठोर होते महसूस किया। उसकी सांस अटकी, एक नरम सिसकी निकली—'आह्ह...'—जब मैंने नरम मांस को मसला, उसकी संकरी कमर व्यर्थ घूमी। ट्यूलिप्स की खुशबू उसके उत्तेजना से मिली, मीठी और नशेदार। मेरा मुंह नीचे उतरा, एक निप्पल पकड़ा, जोर से चूसा जबकि दूसरे को चूंप लिया। वो कराह उठी, 'म्म्म... नहीं, एलियास,' लेकिन उसके हाथ मेरे बालों में उलझे, मुझे करीब खींचते।
मैंने उसके उदर पर चुंबन बरसाए, हाथ संकरी कमर पकड़े, अंगूठे उसके लेसी पैंटी में अटकाए। 'समर्पण करो, जूलिया। तुम यही मांग रही थीं।' मैंने पैंटी उसके लंबी टांगों से नीचे उतार दी, उसे सिर्फ पैंटी में नंगा छोड़ दिया। नहीं—ऊपर से नंगा, अब सिर्फ पैंटी। उसकी हरी आंखें मेरी से जमीं, मनमौजी विद्रोह भूख में पिघला। मैंने उसे घुमाया, बेंच पर झुकाया, मेरी कठोरता मेरी पैंट से उसके गांड से रगड़ खाई। उंगलियां उसकी आंतरिक जांघों को छेड़ीं, ऊपर सरकीं, उसकी गीली फोल्ड्स ढूंढ लीं। वो जोर से कराही, 'ओह्ह... एलियास,' कूल्हे अनिच्छुकता से पीछे धकेले। मैंने उसके क्लिट को धीरे से सहलाया, तनाव बढ़ाते हुए, उसका बदन कांप रहा। 'गिड़गिड़ाओ,' मैंने हुंकार भरी। उसके हांफने ग्रीनहाउस भर दिए—सांसभरी, जरूरतमंद—जब फोरप्ले ने उसकी आग जला दी।


जूलिया की अनिच्छुकता ने मेरी प्रभुत्व को ईंधन दिया जब मैंने अपना धड़कता लंड आजाद किया, बहस की आग से सख्त और नसों वाला। मैंने उसे पूरी तरह वर्कबेंच पर रखा, उसकी पतली गांड ट्यूलिप्स के बीच भेंट की तरह। 'ये मिलता है चोरी करने पर,' मैंने गरजकर कहा, उसकी संकरी कमर पकड़ी। वो नरम कराही, 'एलियास... प्लीज,' विरोध और विनती का मिश्रण। मैंने पीछे से उसे चोदा, डॉगीस्टाइल, मेरा लंड उसकी टाइट चूत को एक ही क्रूर धक्के से फैलाया। वो चीखी—'आह्ह्ह!'—उसकी दीवारें मेरे चारों ओर सिकुड़ीं, गीली और गर्म।
ग्रीनहाउस उसके हांफनों से गूंजा जब मैंने बेरहम चोदना जारी रखा, पीछे से पीओवी में उसकी गांड को हर धक्के से हिलते देखा, गोरी त्वचा लहराती। ट्यूलिप पंखुड़ियां हमारी उन्माद से बेंच के नीचे बिखरीं। उसके लंबे हल्के भूरे बाल लहराए, हरी आंखें अंडाकार कंधे के ऊपर पीछे देखीं, समर्पित भूख से भरीं। 'जोर से,' उसने सांस फूलते हुए फुसफुसाया, तीव्रता की लालसा भले ही खुद से। मैंने मान लिया, हाथ उसके कूल्हों को नीले करते, उसे पीछे खींचते। हर धक्का उसके पतले बदन में झटके भेजता, मध्यम स्तन आजाद उछलते, निप्पल्स लकड़ी को रगड़ते। अहसास बेमिसाल था—उसकी चूत मखमली गर्तन की तरह जकड़ती, मुझे दूहते जब मैं गहरा धकेलता, बॉल्स उसके क्लिट को थप्पड़ मारते।
मैंने बदला, एक हाथ उसके लहराते बालों में उलझाया, सिर पीछे खींचकर रीढ़ मोड़ी। 'अब मेरा,' मैंने गरजकर कहा, उसे कांपते महसूस किया। उसके कराहने बदले—ऊंचे 'ओह्ह! हां!' से गहरे 'म्म्म्फ!'—चरम की ओर बढ़ते। पसीना हमारी त्वचा को चिकना कर गया, नम हवा हर सरकाव, हर गोता बढ़ा रही। मैंने आगे पहुंचकर, उसका सूजा क्लिट जोर-जोर से रगड़ा। जूलिया पहले टूटी, चीखी 'एलियास! आह्ह्ह!' उसकी चूत जंगली ऐंठी, रस मेरे लंड को लथपथ किया। मैं न रुका, उसके चरम को चीरता चोदा, शक्ति का आदान-प्रदान नशेदार—उसका समर्पण पूरा।


पोजिशन चेंज: मैंने उसे पलटा, बेंच पर पीठ के बल, टांगें मेरे कंधों पर, जंगली जोर से फिर घुसा। उसकी हरी आंखें उलट गईं, गोरी त्वचा चमकती, जब मैंने मिशनरी-गहरा चोदा, उसका जी-स्पॉट पीसा। स्तन हांफे, निप्पल्स तने; वो मेरी पीठ को नोचती, कराही 'और... मत रुको।' अहसासों ने घेर लिया—उसकी गर्मी धड़कती, मेरा लंड सूजता। मैं गरजकर झड़ा, उसे गर्म बीज से भर दिया, गिर पड़ा जब वो हर बूंद निचोड़ ली। लेकिन आग बुझी न थी; उसका बदन अभी कांप रहा, इस ग्रीनहाउस फसल में और लालसा।
हम बिखरी ट्यूलिप पंखुड़ियों के बिस्तर पर उलझे लेटे, मेरी बाहें उसके पतले बदन को लपेटे, उसका सिर मेरी छाती पर। जूलिया की सांसें धीमी हुईं, हरी आंखें अब कोमल, मनमौजी चमक असुरक्षा के साथ लौटी। 'एलियास... वो... तीव्र था,' उसने बुदबुदाया, मेरी त्वचा पर पैटर्न बनाते हुए। मैंने उसके लंबे हल्के भूरे बाल सहलाए, बदलाव महसूस किया—प्रभुत्व कोमलता में बदलता। 'तुमने विरोध किया, लेकिन शक्ति की लालसा थी न?' वो अनिच्छुकता से सिर हिलाई, गोरी त्वचा अभी लाल। 'तुम्हारा गुस्सा... उसने कुछ जला दिया। लेकिन पर्यटक, टी हाउस—'
मैंने कोमल चumban से चुप कराया, नमक और मिठास चखते। 'हम संभाल लेंगे। अब चोरी नहीं। फसल बांटो।' उसका अंडाकार चेहरा उठा, मध्यम स्तन मुझसे दबे। 'बांटना? पार्टनर की तरह?' हंसी उफनी, जादुई। हम बात करने लगे, फूलों के बीच आवाजें धीमी—उसके टी हाउस के सपने, मेरी ट्यूलिप विरासत। भावनात्मक जुड़ाव खिल गया, उसकी आंखों में अपराधबोध हिला, लेकिन इच्छा बाकी। 'अब मैं तुम्हें समर्पण करती हूं,' उसने फुसफुसाया, हाथ नीचे सरकाते। बदलाव स्वाभाविक लगा, खुरदुरे किनारे अंतरंगता में नरम, और के लिए तैयार।


जूलिया के शब्दों ने दूसरा राउंड जला दिया। 'देखो मुझे,' उसने सांस ली, मेरी नजरों के नीचे मनमौजी साहस उभरा। वो बेंच से फिसली, ट्यूलिप बिस्तर पर टांगें फैलाईं, उंगलियां अपनी गीली चूत पर। अब खुद को उंगली कर रही, हमारी एक-से-एक शक्ति खेल में, हरी आंखें मेरी से जमीं जब मैं अपना फिर सख्त होता लंड सहला रहा। 'ऐसे, एलियास?' वो कराही, दो उंगलियां गहरा धकेलीं, चमकती फोल्ड्स को फैलातीं। उसका पतला बदन मरोड़ खाया, गोरी त्वचा चमकती, मध्यम स्तन हर धक्के से हांफे।
मैं करीब घुटनों पर बैठा, हुंकारा, 'गहरा, जूलिया। अपना समर्पण दिखाओ।' वो मान गई, अंगूठा क्लिट पर घुमाया, रस चटाखटाहट में सुनाई दिए, उसके कराहने बढ़े—'म्म्म... आह्ह! एलियास!'—बदले और हताश। लंबे लहराते बाल फैले, अंडाकार चेहरा सुख में विकृत। मैंने देखा उसकी गांड उठी, कूल्हे उछले, चूत के होंठ उंगलियों के चारों ओर अश्लील फैले। अहसास जो वो हांफनों में बयां: 'इतना भरा... हर जगह चुभन।' उसका खाली हाथ एक निप्पल चूंपा, बदन मुड़ा जब चरम नजदीक।
पोजिशन शिफ्ट: वो चारों पैरों पर लुढ़की, उंगलियां अभी भी दबीं, गांड मेरी ओर पहले जैसी। 'शामिल हो... लेकिन पहले देखो,' उसने गिड़गिड़ाया। उसकी रफ्तार तेजी, दीवारें दिखते सिकुड़ीं, चरम टूटा—'ओह्ह्ह भगवान! हां!'—हल्का स्क्वर्ट पंखुड़ियों पर। मैं न रुका, अपना लंड उसकी उंगलियों के साथ सरकाया, डबल पेनेट्रेशन का अहसास उसे फिर फैलाया। वो चीखी 'आह्ह्ह!', लहरें सवार, मेरे धक्के ताल में। ग्रीनहाउस की हवा उसकी खुशबू से गाढ़ी, ट्यूलिप्स उसके साहसी समर्पण के गवाह।
मैंने उसे ऊपर खींचा अपने खिलाफ, उंगलियां अब मेरी अंदर जबकि मैंने गला चूमा। लेकिन वो वापस ले ली, जोर-जोर उंगली करती जब मैं उसके स्तनों को सहलाता। चरम फिर बना, बदन ऐंठा—'एलियास! झड़ रही हूं!'—चूत जंगली ऐंठी। मैं फिर अंदर झड़ा, शक्ति का आदान-प्रदान आपसी मुक्ति में चरम पर। थककर गिर पड़े, उसकी मनमौजी हमेशा के लिए इस फसल से बदल गई।
उत्तेजना के बाद नम शांति ने लपेटा, जूलिया मुझसे लिपटी, उसका पतला बदन थका, हरी आंखें नींद भरी। 'वो शक्ति... मैं तरस रही थी,' उसने धीरे स्वीकारा, अपराधबोध चमका—पर्यटक भूले, टी हाउस प्रतिद्वंद्विता स्थगित। मैंने माथा चूमा, ट्यूलिप्स हमारी उलझन को फ्रेम। भावनात्मक भुगतान लगा: उसका समर्पण गहरे जुड़ाव को हिलाया, मेरी प्रभुत्व देखभाल से नरम। लेकिन सस्पेंस दस्तक—ग्रीनहाउस के दरवाजे पर तेज दस्तक। 'जूलिया? गांव से लेना है। टी हाउस की आकर्षण सुनी... सब ठीक?' जूलिया सख्त हुई, फुसफुसाई 'छुपो,' आंखें हुक से भरी तनाव में फैलीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जूलिया के ग्रीनहाउस की कहानी में क्या होता है?
एलियास जूलिया को टी हाउस से ग्रीनहाउस में ले जाकर डॉगीस्टाइल और मिशनरी में चोदता है, उसके विद्रोह को समर्पण में बदल देता है।
कहानी में कितने राउंड सेक्स हैं?
दो मुख्य राउंड—पहला प्रभुत्व वाला चुदाई, दूसरा जूलिया की उंगली प्ले और डबल पेनेट्रेशन से।
ये स्टोरी किसके लिए बेस्ट है?
20-30 साल के हिंदी बोलने वाले लड़कों के लिए, जो explicit ग्रीनहाउस चुदाई और पावर प्ले वाली एरोटिका पढ़ना चाहते हैं। ]





