ग्रेस का बर्फीला केबिन समर्पण
तूफान की उग्र आगोश में, मासूमियत जंगली आग की कामना में पिघल जाती है।
ग्रेस की धड़कती जागृति की चोटियाँ
एपिसोड 3
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बाहर जैक्स की सुनसान केबिन के पास हवा चीख रही थी, बर्फ खिड़कियों पर ईर्ष्यालु प्रेमी की तरह कोड़े मार रही थी। अंदर, ग्रेस मिशेल मुझसे सटकर खड़ी थी, उसके लैवेंडर रंग के लहराते बाल मेरी छाती को छू रहे थे, नीली आँखें हमारी एकांतता के रोमांच से चौड़ी हो गईं। उसकी मिठी मासूमियत मेरे अंदर किसी प्राइमल चीज़ को बुला रही थी, वादा कर रही थी एक ऐसी रात का जहाँ हदें आग की गर्मी में—और हमारे जिस्मों में—घुल जाएँगी। मेरी केबिन तक का सफर एक जुआ था, आसमान पूर्वानुमान से तेज़ी से काला हो गया। ग्रेस ट्रक में मेरे बगल में बैठी थी, उसके छोटे हाथ गोद में मुड़े हुए, वो नीली आँखें घूमती हुई बर्फ के कुबार्ड और मेरे चेहरे पर। हम लॉज बार से बिना बोले तनाव की धुंध में निकले थे—जैक्स हार्लन, यानी मैं, हफ्तों की चुराई नज़रों के बाद आखिरकार उसे भीड़ से चुरा ले आया। पहले उसकी हँसी गूँजी थी, हल्की और प्यारी, लेकिन अब, तूफान घेरते हुए, लग रहा था दुनिया सिमट गई सिर्फ हम तक। जब हम पोर्च की सीढ़ियों पर कड़कड़ाती बर्फ पर चढ़े, तूफान पूरी गर्जना बन चुका था। मैंने दरवाज़ा धक्का देकर खोला, उसे अंदर धकेला जहाँ पाइन और पुरानी लकड़ी की सुगंध ने हमें लपेट लिया। ग्रेस ने अपने लैवेंडर लहरों से बर्फ झाड़ी, मैट पर बूट्स ठोके, उसका छोटा-सा बदन मेरे ट्रक से उधार लिए ओवरसाइज़्ड स्वेटर में बौना लग रहा था। 'मानो हम धरती पर आखिरी लोग हैं,' उसने कहा, आवाज़ नरम, लगभग साँसें थमी हुईं, जबकि वो अपनी गीली जैकेट उतार रही थी। मैंने आग जलाई, देखा लपटें उसके गोरे चेहरे पर नाच रही थीं। हम गलीचे पर मग्स में स्पाइक्ड कोको लेकर बैठे, तूफान केबिन को चीरने को आतुर। बातें यहाँ आसानी से बहने लगीं, जासूस नज़रों से दूर। उसने कबूल किया कि...


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