एलिस की रूपांतरित म्यूज
उसके स्टूडियो की मिट्टी चूमे परछाइयों में, पूजा सृजन बन जाती है।
संगमरमर की कोठरियां: ऐलिस की थरथराती पूजा
एपिसोड 6
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एलिस के निजी स्टूडियो का दरवाजा चरमराता हुआ खुला, जिसमें फ्लोरेंस जैसी लालटेनों की गर्म चमक के खिलाफ उसकी सिल्हूट नजर आई। उसका कैरमल अफ्रो जंगली ढंग से बिखरा हुआ था जबकि वो मिट्टी को गढ़ रही थी, वो जेड-हरी आंखें अपनी कला पर जमी हुईं—या शायद मुझ पर? हवा में अनकही चाहत गूंज रही थी, उसका घंटी जैसा बदन आर्टिस्ट की गंदी स्मॉक से छेड़ता हुआ। मुझे पता था आज रात, इस सृजन की कोठरी में, हमारी भूमिकाएं धुंधली हो जाएंगी, उसका आत्मविश्वास मुझे आपसी समर्पण के नाच में खींच लेगा। मैं एलिस के निजी स्टूडियो की कोठरी में कदम रखा, हवा गीली मिट्टी और पुरानी लकड़ी की मिट्टी जैसी महक से भरी हुई। ये उसका शरणस्थल था, गैलरी में छिपा कोना जो फ्लोरेंस के साये वाले एटेलियरों को जगा देता—गुम्बददार छत पर साये वाली कैनवास लटके, आधे बने मूर्तियां पुनर्जागरण भूतों की फुसफुसाहट करतीं। लालटेनों ने वर्कबेंच पर सुनहरी रोशनी डाली जहां एलिस खड़ी थी, उसका चीनी मिट्टी जैसा चमकदार चेहरा मिट्टी के कणों से सजा, वो भरा-भरा कैरमल अफ्रो उसके चेहरे को जंगली हेलो की तरह घेरा। उसने आकार लेते गोले से नजरें उठाईं, जेड-हरी आंखें चमक रहीं उस शरारती आत्मविश्वास से जो हमेशा मुझे उलझा देता। 'डांटे,' उसने कहा, उसकी आवाज नीची गुर्राहट जो हमारी दूरी में लहराती, 'तुम आ गए। मुझे यकीन नहीं था कि तुम मेरी म्यूज को आज रात बीच में टोकने की हिम्मत करोगे।' उसके होंठ आधा मुस्कुराए, और मैंने खिंचाव महसूस किया, वो चुंबकीय खिंचाव जो हमारी पहली मुलाकात से उसने मुझ पर थामा था। मैं धीरे से कमरे को पार किया, नजरें उसके ढीली स्मॉक और लेगिंग्स के नीचे घंटी जैसे बदन की लकीर पर घूमीं, घंटों की मेहनत से गंदी। 'मैं कैसे दूर रहता?' मैंने जवाब दिया, इतना करीब रुककर कि मिट्टी के नीचे हल्की फूलों की खुशबू पकड़...


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