एलिफ का लंदन गुप्त गठबंधन
छायादार रैकों में, रणनीति ने आत्मसमर्पण कर दिया।
एलिफ की फुसफुसाती समर्पण चालें
एपिसोड 4
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उसकी हरी आँखें लाइब्रेरी की लैंप की मद्धम रोशनी को पकड़ रही थीं, राज़ लिए हुए जो किसी शतरंज की चाल से भी ज्यादा तीखे थे। एलिफ डेमिर करीब झुकी, उसकी साँस मेरी त्वचा पर फुसफुसाहट की तरह, आग में तपे गठबंधन का वादा करते हुए। लंदन के छिपे आर्काइव में, हमारा खेल अभी शुरू ही हुआ था—बुद्धि और कामुकता आपस में उलझी, राजाओं को गिराने को तैयार। निजी लाइब्रेरी आर्काइव की हवा में पुरानी चमड़े और चमकदार ओक की महक भारी लटक रही थी, लंदन के इनविटेशनल के शोर से अलग-थलग एक शरणस्थली। मैं आधी रात के बाद चुपके से अंदर घुसा था, मेरा दिमाग दिन के मैचों को दोहरा रहा था—विक्टर की अभिमानी मुस्कान जब वो अपनी कलाओं को कठपुतली की तरह हिला रहा था, तार खींचते हुए जो मुझे ठीक से दिख नहीं रहे थे। एलिफ डेमिर पहले से ही वहाँ थी, एक विशाल पढ़ने की मेज के किनारे पर बैठी, उसके लंबे गहरे भूरे बाल एक कंधे पर लहरों की तरह बह रहे थे जैसे आधी रात का रेशमी झरना। उसने एक साधारण काली ब्लाउज पहनी थी जो उसके पतले बदन से चिपकी हुई थी और एक पेंसिल स्कर्ट जो घुटनों के ठीक ऊपर खत्म होती थी, शालीन फिर भी किसी इरादे से लबालब। उसकी हरी आँखें मेरी ओर उठीं, तीखी और आँकती हुईं, वही नजर जो मॉस्को में बोर्ड के पार मुझे बेचैन कर चुकी थी। 'अलेसांद्रो,' उसने धीरे से कहा, उसका तुर्की लहजा मेरे नाम को मखमल की तरह लपेटते हुए। 'तुम आ गए। अच्छा। विक्टर हम दोनों को खेल रहा है—प्यादा अलग करके केंद्र पर कब्जा करने को।' मैंने सिर हिलाया, उसके सामने कुर्सी खींची, हमारी घुटने मेज के नीचे लगभग छू रहे थे। टूर्नामेंट ब्रैकेट के नक्शे हमारी सामने बिखरे पड़े थे, उसके साफ-सुथरे लिखावट से नोट किए हुए। जैसे ही हम...


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