अमिरा की दुबई हिसाब-किताब उजागर
सौक की परछाइयों में छिपीं अनियंत्रित इच्छाएँ
अमिरा का तूफानी सरेंडर: आधी रात के शिकारी को
एपिसोड 5
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दुबई के सौक की हवा मसालों और राज़ों से भरी हुई थी, लेकिन अमिरा महमूद जितनी नशे वाली कोई नहीं। जीरा और इलायची की खुशबू मेरे चारों तरफ घूम रही थी जैसे किसी प्रेमी की फुसफुसाहट, मेरे कपड़ों से चिपकती हुई जबकि मैं इन घुमावदार गलियों में घूम रहा था, हर सांस मुझे इस प्राचीन बाजार की गहराई में खींच रही थी जो छिपी इच्छाओं की धड़कन से जीवंत था। वहाँ वह थी, अपने परिवार की दुकान के काउंटर के पीछे, उसके चटखारे लाल बाल लालटेन की रोशनी को पकड़ रहे थे जैसे वर्जित आग, झिलमिलाती चमक में नाचती लपटें जो मेरी नजर को अपनी ओर खींच रही थीं, समंदर पार उलझे चादरों और बिना सांस के रातों की यादें जला रही थीं। मैं, लुका वॉस, उसे महाद्वीपों पार दौड़ा आया था, मेरा प्राइवेट जेट पेरिस से यहाँ तक आकाश काटता हुआ, एक जुनून ने जो मेरी छाती को लोहे की तरह जकड़ रखा था, हर मील उस खिंचाव का सबूत जो उसकी तरफ से मेरी रूह पर था। और अब, उसके एयरलाइन जॉब पर अफवाहें घूम रही थीं जो हमें कांड में रंग रही थीं, एक एयर होस्टेस के खोए ख्यालों में, किसी पायलट के नाम का जिक्र होते ही उसके गाल लाल हो जाते, सहकर्मियों की नजरें आंकने लगतीं जो हमारे बीच की आग को और भड़का रही थीं। उसके नीले आँखें मेरी आँखों से मिलीं भीड़भाड़ वाली गली के पार, एक चुनौती, एक वादा, वे नीलम की गहराइयाँ मुझे इतनी तीव्रता से जकड़ रही थीं कि मेरे पेट के नीचे गर्मी लहराने लगी, एक मौन प्रतिज्ञा जो समर्पण और जीत को आपस में बुन रही थी। मैं उसके आलकोव की परछाइयों में कदम रखा, दिल धड़क रहा था, खरीदारों की चीखों से ज्यादा तेज़ कानों में गूंजती धड़कन, हर कदम दूरी कम कर रहा था जो उत्साह...


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