अज़ार के ऑफिस में बॉस का समर्पण

अंधेरे ऑफिस में, मैंने टकराव को नशे की तरह समर्पण में बदल दिया।

अज़ार की पत्थरीली गलियों की तड़प जाग उठी

एपिसोड 4

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ऑफिस देर रात में भूतिया शहर जैसा था, फोन और बातचीत की हलचल की जगह ऊपर झिलमिलाती फ्लोरेसेंट लाइटों की गुनगुनाहट। मैं, मिस्टर खलील रेज़ा, रेज़ा टूर्स का मालिक, अपनी महोगनी डेस्क पर बैठा था, फ्लोर-टू-सीलिंग खिड़कियों से शहर का स्काईलाइन चमक रहा था जैसे दूर के तारे मेरी हताशा का मज़ाक उड़ा रहे हों। कागज बिखरे पड़े थे, आगामी म्यूजिक फेस्टिवल के टूर प्लान आधे-अधूरे, लेकिन मेरा दिमाग कहीं और था। अज़ार जाफरी, मेरी 20 साल की पर्शियन इंटर्न, ने कल ब्रेक रूम टेबल पर अपनी जर्नल खुली छोड़ दी थी। लापरवाही का चूक, लेकिन जो मैंने झलक देखी वो मुझे हिला गई—डेमन और एलेना जैसे नाम, 'बैकस्टेज रिस्क्स' और 'गिल्टी थ्रिल्स' पर रहस्यमयी नोट्स। क्या वो जासूसी कर रही थी? क्लाइंट लिस्ट लीक कर रही? या बदतर, कुछ ऐसा जिसमें मेरा बिज़नेस डूब जाए? मैंने घड़ी देखी: रात 9 बजे। मैंने उसे 'तुरंत चर्चा' के लिए मैसेज किया था। हॉलवे में कदमों की गूंज, हल्के और ऊर्जावान, बिलकुल अज़ार जैसे। वो अंदर घुस आई, उसके लंबे घुंघराले काले बाल कंधों पर लहराते हुए, गहरे भूरे आंखें उस अटूट आशावाद से चमकतीं। 5'6" की एथलेटिक स्लिम बॉडी, कांस्य की चमकदार त्वचा धुंधली लाइटों में चमक रही, वो एक दर्शन थी—अंडाकार चेहरा लहरों से घिरा, मीडियम चुचियां टाइट सफेद ब्लाउज़ से हल्के से उभरीं, संकरी कमर काली पेंसिल स्कर्ट से चिपकी हुई। 'मिस्टर रेज़ा? आपने बुलाया?' उसकी आवाज़ खुशमिजाज़, लगभग शरारती, जैसे ओवरटाइम का समन मजेदार एडवेंचर हो। मैं पीछे झुका, खुद को स्टील किया। 'अज़ार, बैठो। हमें तुम्हारी जर्नल के बारे में बात करनी है।' उसकी मुस्कान एक सेकंड के लिए लड़खड़ाई, लेकिन वो संभल गई, मेरे सामने कुर्सी के किनारे पर बैठी, टांगें क्रॉस करते हुए चंचल झूलते। हवा गाढ़ी हो गई, अनकही इल्ज़ामों से चार्ज। वो खुशमिजाज़, आशावादी, ऊर्जावान थी—क्लाइंट-फेसिंग टूर्स के लिए अमूल्य—लेकिन आज रात, वो...

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