अकिरा का ब्लॉसम क्रोध का सामना
पंखुड़ियाँ भोर की रोशनी में राज़ों की तरह बिखरती हैं, जहाँ क्रोध उग्र वासना में खिल उठता है।
अकिरा की फुसफुसाती साकुरा ने जगा दीं छिपी लपटें
एपिसोड 5
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भोर की पहली किरण ने चेरी ब्लॉसम को गुलाबी और सोने के रंगों से रंग दिया, लेकिन अकिरा के चेहरे पर तूफान छाया था। हाना के शब्द हवा में तीखे लटक रहे थे, राज़ गिरते पंखुड़ियों की तरह बह रहे थे। मैंने उसे काँपते देखा, उसकी गहरी भूरी आँखों में शर्मीली चिंगारी विद्रोह में भड़क उठी। जब वो मुझसे मुड़ी, उसका हाथ मेरे हाथ में आ गया, मुझे बगीचे के दिल में खींचते हुए जहाँ सामंजस्य इंतज़ार कर रहा था, कच्चा और अनिवार्य, वादा करते हुए एक जुनून का जो हम दोनों को हिला देगा। चेरी ब्लॉसम बगीचे की हवा में भोर की हल्की-मीठी ठंडक घुली थी, पंखुड़ियाँ आलसीपन से रात के फुसफुसाहटों की तरह बह रही थीं। मैं अकिरा के घबराए हुए मैसेज के बाद यहाँ आया था, मेरा दिल चिंता और उसके उस अनदेखे खिंचाव के मिश्रण से धड़क रहा था। वो खिले डालों की छतरी के नीचे खड़ी थी, उसकी पतली काया नरम गुलाबी युकाटा में लिपटी हुई, जो हवा में हल्के से लहरा रही थी, कपड़ा इतना चिपक रहा था कि नीचे की नाजुक वक्रों का इशारा दे रहा था। हाना भी वहाँ थी, उसकी आवाज़ तीखी थी जब वो अकिरा से भिड़ी। 'तुम्हें लगता है तुम इसे सबसे छिपा सकती हो? अपने बॉस के साथ घूमना जैसे कोई गुप्त अफेयर?' हाना की आँखें विश्वासघात से चमकीं, वो दोस्ती जो उन्होंने बाँटी थी अकिरा की मेरे साथ छिपी रातों के बोझ तले टूट रही थी। अकिरा की गोरी चीनी जैसी त्वचा लाल हो गई, उसके लंबे सीधे काले बाल झटके से लहराए, गहरी भूरी आँखें शर्मीली कमजोरी से फैली हुईं जो मेरी छाती को कस रही थीं। 'मैं छिपा नहीं रही थी,' अकिरा बुदबुदाई, उसकी आवाज़ नरम लेकिन स्थिर, तनाव के बावजूद वो चंचल लय घुस आई। 'ये बस... हो गया। केनजी, वो मुझे देखता है।'...


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