सावोफ़ा का कर्ज़बद्ध चरमोत्कर्ष
विश्वासघात की छायाओं में कब्ज़ा भड़कता है, जहाँ समर्पण जंगली पुनर्प्राप्ति बन जाता है।
सावोफा की कांपती तारें: छिपे आनंद की कंपन
एपिसोड 5
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उसकी काली आँखें केबिन की मद्धम रोशनी में मेरी आँखों से मिलीं, उनकी गहराई में तूफ़ान उमड़ रहा था। सावोफ़ा वहाँ खड़ी थी, नाज़ुक फिर भी विद्रोही, उसके बहुत लंबे काले बाल बैंगनी हाइलाइट्स के साथ एक ऐसे चेहरे को घेरते हुए जो हज़ार राज़ छिपाए हुए था। हवा में अनकही कर्ज़ों से भारीपन छा गया, मेरी जलन सीने में नाखून ताने जीवित प्राणी की तरह खरोंच रही थी। आज रात, कोई और मेरी चीज़ को नहीं छुएगा। पास ही के लग्ज़री सूट में, हमारा द्वंद्व चरम सुख में समाप्त होगा—या बर्बादी में। केबिन का दरवाज़ा लेखक के पीछे ज़ोर से बंद हुआ जब वो रात में भागा, उसकी कायरता ने कमरे से सारी ऑक्सीजन चूस ली। सावोफ़ा फायरप्लेस के पास जमी हुई खड़ी थी, उसका पतला काया मेरी नज़रों के बोझ तले हल्का काँप रही थी। मैं अफ़वाहों और उस कुत्सित कब्ज़े की भावना से प्रेरित होकर यहाँ पहुँचा था जो हमारी पहली उलझी रात से मुझे सता रही थी। वो मेरी थी क्लेम करने के लिए, उसके मेरे प्रति कर्ज़ हर शर्मीली नज़र में刻े हुए थे। 'सावोफ़ा,' मैंने कहा, मेरी आवाज़ निचली और स्थिर, करीब आते हुए जब तक आग की गर्मी मेरी पीठ को चाटने न लगी। उसकी गहरी भूरी आँखें मेरी ओर उठीं, डर और कुछ और तेज़—शायद विद्रोह, या समर्पण की चिंगारी—से चौड़ी। वो सीधे रेशमी बाल, बहुत लंबे और काले बैंगनी हाइलाइट्स के साथ, उसके सिर झुकाने पर एक कंधे पर पर्दे की तरह गिरे। 'तुम्हें लगता है तुम ये खेल खेल सकती हो? हमारे बीच में किसी और मर्द को ला सकती हो?' उसने अपनी निचली होंठ काटी, वो उसकी नाज़ुक आदत जो हमेशा मेरे अंदर कुछ गहरा मरोड़ देती थी। 'प्रोफ़ेसर वॉस... कै... वैसा नहीं था। वो बस... हमारे बारे में लिख रहा था। प्रेरणा।' उसकी आवाज़ नरम थी, थाई विरासत की...


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