वेरा की छिपी तड़प पर नजर
लाइब्रेरी के छायादार कोने में, उसकी परछाई हर छिपी लालसा को बेनकाब कर देती है।
वेरा का तन्हा नाच: निकोला की भूखी पूजा
एपिसोड 5
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रिट्रीट की लाइब्रेरी का वो कोना उसके चारों तरफ लिपट गया था जैसे कोई राज़, अलमारियाँ ऊँची-ऊँची पुरानी किताबों से भरी हुईं सर्बियन लोककथाओं की, हवा में पुराने कागज और चमकदार लकड़ी की महक घुली हुई, मिली हुई पॉलिश की सतहों से आने वाली मोमबत्ती की हल्की सी खुशबू के साथ जो सदियों की फुसफुसाहटें समेटे लगती थीं। हर साँस में भूली हुई कहानियों की सड़ांध भरी अंतरंगता आ रही थी, मुझे और गहराई में खींचती हुई इस छायादार आश्रय में जहाँ समय खुद रुक गया लगता था। वेरा वहाँ बैठी थी, उसके लंबे चमकदार मेटालिक सिल्वर बाल धीमे लैंप की रोशनी में चमकते लहरों में लहरा रहे थे, सीधे बीच से गुंथे बाल उसके गोरे जैतूनी चेहरे को फ्रेम कर रहे थे जबकि वो कोलो नृत्य की किताब में डूबी हुई थी, उसके पतले उंगलियाँ पन्ने पलट रही थीं श्रद्धा से जो मुझमें कुछ primal उकसा रही थीं। वो हेज़ल आँखें, दूर और सताई हुईं, पन्नों पर सरक रही थीं, लेकिन मुझे पता था कि कल रात मेरे शब्द उसके दिमाग में घूम रहे थे—शब्द कब्जे के बारे में, इस बारे में कि मैं उसकी essence को पत्थर में हमेशा के लिए उकेर दूँगा, अंधेरी घड़ियों में फुसफुसाए जब उसकी पहरेदारी ढीली थी, उसकी साँस मेरी त्वचा पर गर्म लग रही थी जबकि वो मेरे बगल में नंगी लेटी हुई थी। मैं देख सकता था उसके कंधों के हल्के तनाव में, उसके होंठों के थोड़े खुले होने में जैसे वो उन वादों को दोबारा चख रही हो, उसका दिमाग मेरे वचन की तीव्रता को दोहरा रहा हो उसके हर कर्व को, हर सिसकी को अमर बनाने का। वो सोचती थी कि वो छिप रही है, इस कोने में पीछे हटकर हमारी पूर्वजों के घूमते कदमों की रिसर्च कर रही है, खुद को हमारी खून की लयबद्ध लोककथाओं में डुबो...


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