दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब

समर्पण और साझा आनंद की परछाइयों में खिलना

डाओ की फुसफुसाती कामुक कमलें

एपिसोड 5

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दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब
दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब

पहाड़ी मंदिर का ध्यान कक्ष देर दोपहर की सुनहरी धूप में नहाया हुआ था जो जालीदार लकड़ी की खिड़कियों से छनकर आ रही थी। अगरबत्ती का धुआं हवा में सुस्ती से लहरा रहा था, चंदन और चमेली की हल्की मिट्टी जैसी खुशबू लिये, जो कभी दाओ मोंगकोल की बेचैन आत्मा को शांत करती थी। अब 25 साल की इस पतली थाई हसीना मास्टर अरुण के सामने खड़ी थी, उसके लंबे लहराते भूरे बाल गर्म भूरी पीठ पर रेशमी झरने की तरह बह रहे थे, उसके अंडाकार चेहरे को फ्रेम करते हुए जिसमें गहरे भूरे आंखें विद्रोह और अनकही लालसा के मिश्रण से चौड़ी थीं। उसकी मध्यम चुचियाँ पतली रेशमी परंपरागत साड़ी के नीचे ऊपर-नीचे हो रही थीं, जो ढीली लपेटी हुई 5'6" पतली काया के चारों ओर थी, नीचे की वक्रताओं का इशारा देती हुई।

मास्टर अरुण, कठोर और भारी-भरकम केसरिया चोगे में, चेहरे पर सालों की संयमित तपस्या की लकीरें, उसे कमल की कांटे जैसी नजरों से घूर रहा था। 'दाओ, तेरी भटकावों ने तेरी साधना की शुद्धता को जहर दे दिया है,' उसने गहरी गूंजती आवाज में कहा, जो पत्थर के फर्श पर फीकी मंडलों से सजी दीवारों से गूंजी। 'तेरे अंदर का निषिद्ध कमल उखाड़ना होगा, वरना तुझे इस आश्रम से निकाल दिया जाएगा।' दाओ का दिल धड़क रहा था, हाल की गलतियों की यादें दिमाग में उमड़ आईं—काई, उसके प्रेमी के साथ गुप्त मिलन की रातें, और लीना, रहस्यमयी साथी के साथ फुसफुसाहटें जो उसकी उभरती इच्छाओं को समझती थी। स्वप्निल और रोमांटिक स्वभाव की दाओ हमेशा सामंजस्य चाहती थी, लेकिन अब इच्छा कर्तव्य से लड़ रही थी।

वो करीब आई, ठंडा संगमरमर उसके नंगे पैरों को चूम रहा था, सांसें तेज हो गईं जब उसने उसकी आंखों में देखा। हवा में तनाव घना हो गया, दूर मंदिर की घंटियों की खनक इसकी गंभीरता को रेखांकित कर रही थी। दाओ को उसके अल्टीमेटम का बोझ महसूस हो रहा था, फिर भी डर के नीचे एक मोहक आग भड़क रही थी। क्या रहम शब्दों से नहीं बल्कि समर्पण से मांगा जा सकता है? उसके उंगलियां कांप रही थीं जब साड़ी का गाँठ छुआ, कपड़ा उसकी त्वचा से फुसफुसा रहा था। कक्ष ने सांस रोक ली मालूम पड़ रही थी, परछाइयां लंबी हो रही थीं सूरज नीचे सरकते हुए, эфиरल पैटर्न डालते हुए जो उसके शरीर पर नाच रहे थे जैसे सहलाती हथेलियाँ। इस पवित्र स्थान में दाओ परिवर्तन की कगार पर थी, उसकी रोमांटिक आत्मा इच्छा को ज्ञान में बुनना चाह रही थी।

दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब
दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब

दाओ की गहरी भूरी आंखें मास्टर अरुण की आंखों पर जमीं, पतली उंगलियाँ साड़ी के किनारे पर ठहरीं जैसे पूरी तरह खोलने का फैसला कर रही हों। मास्टर का चेहरा निर्लिप्त रहा, लेकिन उसने उसकी नजर में हल्की चमक पकड़ी, उसके सन्यासी कवच में दरार। 'मास्टर, मैं निकाले जाने की नहीं, समझ की तलाश में हूँ,' उसने बुदबुदाया, आवाज नरम और संगीतमय, स्वप्निल लहजे से लिपटी जो हमेशा सबको मोहित करती थी। वो एक और कदम बढ़ाया, दूरी मिटाते हुए जब तक उसके शरीर की गर्मी अगरबत्ती भरी हवा में उसके साथ न मिल जाए। कक्ष की पत्थर की दीवारें, प्राचीन सूत्रों से तराशीं, करीब आती मालूम पड़ीं, हर सांस, हर धड़कन को बढ़ा रही।

अरुण ने भुजाएँ मोड़ीं, चौड़ी कंधे चोगे को खींच रहे थे। 'समझ अनुशासन से आती है, दाओ। उस लड़के काई के साथ तेरी चक्कर और लीना के साथ फुसफुसाहटें संघ को बिगाड़ रही हैं।' उसने उसके राज जानबूझकर बताए, लहजा कठोर फिर भी कुछ गहरा—शायद पछतावा, या दबी लालसा। दाओ का दिमाग दौड़ रहा था, तारों भरी आकाश के नीचे काई के जुनूनी आलिंगनों और लीना की जानकार मुस्कानों की यादें जो उसके जागरण में साथ का वादा करती थीं। लेकिन यहाँ अरुण का सामना करते हुए, उसे ताकत का बदलाव महसूस हुआ। उसका रोमांटिक स्वभाव उसे दरार पाटने को उकसा रहा था, कठोरता से रहम बहकाने को।

'मैं खुद को तेरी मार्गदर्शकता को सौंपती हूँ,' उसने फुसफुसाया, हाथ बढ़ाकर उसके सीने पर केसरिया कपड़े को सहलाया। अरुण सख्त हो गया, लेकिन पीछे नहीं हटा। 'मुझे रास्ता दिखा, मास्टर। मेरी भक्ति साबित करने दे।' उसके शब्द हवा में लटके, इशारों से भरे। उसने तेज सांस छोड़ी, हाथ ने उसके हाथ को पकड़ लिया, मजबूती से। 'ये खतरनाक जमीन है, बच्ची।' फिर भी उसकी अंगूठी ने उसके हथेली को रगड़ा, चिंगारी भड़काई। दाओ की नसें धड़क रही थीं, पतली काया उत्साह से जीवंत। वो झुकी, सांस उसके गले पर गर्म। 'खतरा कमल की मिट्टी है।'

दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब
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तनाव और कस गया जब अरुण का संकल्प डगमगाया, खाली हाथ उठा उसके अंडाकार चेहरे को थामा। दाओ के विचार घूमे—शपथ तोड़ने का अपराधबोध, निषिद्ध का रोमांच। बाहर हवा ताड़ के पत्तों को सरसराई, लेकिन अंदर खामोशी छाई सिर्फ उनकी सांसों के मिश्रण को छोड़कर। वो और करीब दबी, मध्यम चुचियाँ उसके सीने से रगड़ीं, उसके अंदर से गहरी कराह निकली। 'तू किस्मत को ललकार रही है,' उसने गरजकर कहा, लेकिन पकड़ मजबूत हो गई कब्जे वाली। दाओ ने अंदर मुस्कुराई, उसकी मोहकता अपना जादू बुन रही थी। रहम हाथों में था, लेकिन आत्मा पर क्या कीमत? अल्टीमेटम तलवार की तरह लटका था, फिर भी इच्छा बेरोक खिल रही थी।

दाओ की उंगलियाँ चुटकी से साड़ी का गाँठ खोल दिया, रेशम उसके पैरों पर जमा, ऊपर से नंगी काया उजागर, मध्यम स्तन कड़े निप्पलों के साथ ठंडी कक्ष हवा को नंगे। मास्टर अरुण की आंखें भूख से काली हो गईं जब उसने उसकी गर्म भूरी त्वचा, पतली 5'6" काया को छनी धूप में चमकते पिया। वो कपड़े से बाहर निकली, अब सिर्फ पतली लेस पैंटी में जो कूल्हों से चिपकी, लंबे लहराते भूरे बाल लहराते हुए जब दूरी मिटाई। 'मुझे सिखा, मास्टर,' उसने सांस ली, हाथ उसके चोगे पर चढ़ाकर खोले।

अरुण की सांस अटकी, हाथों ने उसकी संकरी कमर पकड़ी, उसे चिपका लिया। दाओ हल्के से हांफी, उसकी उत्तेजना पैंटी के पतले परदे से जांघ पर दब रही महसूस हुई। उसकी गहरी भूरी आंखें पलकीं झपकाईं जब उसके होंठों ने उसके को कठोर चुम्बन में ले लिया, जीभें दबी जुनून की लय में नाचीं। वो उसके मुंह में सांसदार कराही, उंगलियाँ उसके बालों में उलझीं, गहराई की तरफ उकसाईं। उसके हथेलियों ऊपर घूमीं, चुचियों को थामा, अंगूठे संवेदनशील निप्पलों के चारों ओर घुमाए, कोर में सुख की बिजलियाँ भेजीं। 'आह्ह... मास्टर,' उसने फुसफुसाया, उसके स्पर्श में मुड़ी।

दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब
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उसने चुम्बन तोड़ा, गर्म होंठ गर्दन पर उतारे, कुर्ते की हड्डी को काटा जब एक हाथ नीचे सरका, लेस पैंटी के किनारे को रगड़ा। दाओ का शरीर कांपा, रोमांटिक आत्मा शक्ति बदलाव में आनंद ले रही—मोहक से विनतीकर्ता। वो उसके हाथ पर रगड़ी, नरम सिसकी निकली जब उंगलियाँ कपड़े के नीचे सरकीं, गीली चूत की सिलवटों को छुआ। 'अनुशासन के लिए इतनी गीली,' उसने भारी आवाज में कहा। उसके कूल्हे सहज झटके, चिढ़ाने वाली सहलाहट से सुख बढ़ा। अंदर संघ चला—ये ईशनिंदा थी—फिर भी खुलासा जैसा लगा।

अरुण ने उसे आसानी से नीचे के वेदी पर उठाया, टांगें फैलाईं जब वो किनारे पर बैठी, लेस पैंटी तनी हुई। वो घुटनों पर आया, मुंह उसके स्तनों के पास, सांस त्वचा को चिढ़ाई फिर एक निप्पल पर चिपका, जोर से चूसा। दाओ चिल्लाई, 'म्म्म... हाँ,' हाथ उसके कंधों को नाखून गाड़े पकड़े। गर्मी की लहरें दौड़ीं, फोरप्ले बढ़ा जब उंगलियाँ गहराई में गईं, क्लिट को माहिर दबाव से घुमाईं। वो एहसास में खो गई, हर सहलाहट सांसदार कराहें खींच रही, शरीर निषिद्ध नृत्य को समर्पित।

मास्टर अरुण ने चोगा तेजी से उतारा, उसका सख्त लंड बाहर उछला जब दाओ की आंखें स्वप्निल भूख से चौड़ी हुईं। वो वेदी से फिसली, ठंडे संगमरमर पर घुटनों पर, गर्म भूरी हाथों ने मोटे डंडे को पकड़ा। 'मुझे पूजा करने दे,' उसने गरमाई से कहा, अंडाकार चेहरा ऊपर झुकाया फिर जीभ बाहर, नीचे की तरफ धीरे रगड़ी। अरुण गहराई से कराहा, 'दाओ... आह्ह,' उंगलियाँ उसके लंबे लहराते भूरे बालों में उलझीं। उसने मुंह में लिया, होंठ फैले, लयबद्ध जोश से चूसी, गहरी भूरी आंखें उसकी पर जमीं जब लार चमक रही।

दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब
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सुख उसके माध्यम से उमड़ा जब वो ऊपर-नीचे हुई, गाल धंसे, एक हाथ आधार सहलाया दूसरा अंडकोष थामा। अरुण के कूल्हे हल्के धके, मुंह चोदा कराहें से भरा कक्ष—उसकी गहरी, उसकी दबी जरूरतमंद। 'म्म्म्फ... कितना अच्छा,' उसने पीछे हटकर हांफा, लार की डोरें जोड़ रही। उसने उसे खींचा, घुमाया वेदी पर झुकाया, लेस पैंटी एक तरफ खींची। दाओ बेचैन सिसकी, पतली काया कांपती जब नोक गीली चूत के मुंह पर दबी। एक जोरदार धक्के से गहराई में दफनाया, उसे खूबसूरती से फैलाया। 'ओह्ह्ह... मास्टर! हाँ!' उसने चिल्लाया, दीवारें उसके मोटे पर सिकुड़ गईं।

उसने बेरहम चोदा, हाथ संकरी कमर पकड़े, त्वचा थप्पड़ की आवाज कम—उसकी बढ़ती कराहों पर फोकस, 'आह्ह... जोर से... म्म्म!' हर धक्का गहराई मारी, कोर में बिजलियाँ भेजीं, मध्यम चुचियाँ हर टक्कर से उछलीं। दाओ के विचार बिखरे—आनंद अपराधबोध को कुचला, रोमांटिक सार ने अपवित्र में कविता पाई। अरुण ने आगे झुका, उंगलियाँ सूजी क्लिट को रगड़ीं, चरम तेज किया। वो पहले टूटी, चरम मंदिर की लहरों जैसा आया, 'मैं झड़ रही हूँ... आआह!' शरीर ऐंठा, रस उस पर पोता।

बिना रुके, उसने उसे पीठ के बल वेदी पर उलटा, टांगें कंधों पर अटकाईं गहरी घुसपैठ के लिए। दाओ की चीखें चरम पर, 'गहरा... ओह भगवान, हाँ!' जब वो अंदर धमका, नाखून उसकी पीठ रगड़े। पसीने से भीगे शरीर सामंजस्य में चले, दूसरा चरम कोण से तेजी से बना जी-स्पॉट पीसते। अरुण की लय लड़खड़ाई, कराह कच्ची, 'दाओ... ले ले,' जब वो अंदर फूटा, गर्म झटके उसकी धड़कती गर्मी भरते। उसने अपना चरम निकाला उसे दूधते हुए, आनंद की लहरें अनंत। वो साथ गिरे, सांसें उखड़ीं, कक्ष उनकी साझा हांफों से गूंजा। दाओ बदली महसूस हुई, इच्छा एकीकृत, फिर भी खतरा बाकी—क्या रहम कमाया?

दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब
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उत्तर-चरम में, मास्टर अरुण ने दाओ को करीब थामा, कठोर मुखौटा नरम हुआ जब लंबे भूरे लहरों को सहलाया। 'तूने भक्ति दिखाई,' उसने फुसफुसाया, होंठ माथे को छुए। 'रहम तेरा है, लेकिन कमल की रक्षा कर।' दाओ ने सिर हिलाया, गहरी भूरी आंखें भावुक नम, रोमांटिक में निषिद्ध के बीच कोमलता चख रही। वो तेजी से कपड़े पहने, साड़ी बांधी, कक्ष से फिसली, दिल नई हिम्मत से धड़कता।

पहाड़ी बालकनी पर चढ़ते घुमावदार रास्ते पर, शाम की हवा रात के फूलों की झलक लाई। वहाँ काई इंतजार कर रहा था, उसकी पतली काया संध्या आकाश के खिलाफ सिल्हूट, लीना बगल में, उसकी मौजूदगी सांत्वना देने वाली साथी। काई की आंखें राहत से चमकीं जब दाओ करीब आई। 'मेरी जान, तेरे लिए डर लग रहा था,' उसने कहा, आलिंगन में खींचा। लीना ने जानकार मुस्कुराई, 'बहन, तू खिली है।' दाओ काई की बाहों में पिघली, गहरा चुम्बन लिया जो पुनर्मिलन बोल रहा था। 'अरुण ने छोड़ दिया,' उसने धीरे कबूल किया, 'लेकिन मेरी इच्छाएँ जागी हैं।'

वो बुनाई गद्दों पर उलझे बैठे, बालकनी के लकड़ी के रेलिंग धुंधले घाटियों पर नजर। बातें अंतरंग बहने लगीं—काई का हाथ उसके में, लीना की उंगलियाँ बांह पर सांत्वना पैटर्न रचतीं। 'हम हमेशा तेरी राह रहे,' काई ने बुदबुदाया। दाओ को भावनात्मक बंधन मजबूत महसूस हुआ, परिवर्तन ने उन्हें करीब बांधा, कोमल शब्दों ने कर्तव्य और दिल के बीच खाई पाटी।

दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब
दाओ का निषिद्ध कमल का हिसाब

बालकनी पर, बाधाएँ चांदनी के पर्दों जैसी उतरीं, दाओ ने काई पर सवारि की, साड़ी ऊपर चढ़ाई जब लीना भूखी आंखों से देख रही। काई के हाथ पतली काया घूमे, कपड़े उधेड़ गर्म भूरी त्वचा नंगी। 'मेरा कमल,' उसने सांस लिया, उसे सख्त लंड पर उतारा। दाओ गहराई से कराही, 'काई... म्म्म, भर दे,' धीरे डूबी, उसकी टाइट चूत ने इंच-इंच लपेटा। लीना बगल घुटनों पर, होंठ दाओ के निप्पल पकड़े चूसे जब दाओ सवारी करने लगी, कूल्हे कामुक लहरों में हिले।

सुख तेज हुआ, दाओ की चीखें रात में गूंजीं—'आह्ह... हाँ, तुम दोनों!'—मध्यम चुचियाँ हांफ रही, लंबे लहराते बाल फटाफट। काई ने ऊपर धक्का दिया, हाथ संकरी कमर पर, जबकि लीना की उंगलियाँ नीचे सरकीं दाओ की क्लिट घुमाईं, उत्तेजना से गीली। ग्रुप गतिशीलता धड़की—दाओ जोर से रगड़ी, शरीर मुड़ा पहला चरम बनाते। 'मैं... झड़ रही... ऊऊह!' उसने चिल्लाया, काई के चारों ओर ऐंठी, दीवारें जंगली फड़फड़ाईं। लीना ने जुनूनी चुम्बन लिया, जीभें उलझीं हांफों में।

वो सहज बदले; काई ने दाओ को पीठ के बल लिटाया, टांगें चौड़ी फैलाईं गहरी मिशनरी स्टाइल में धमका, लीना दाओ के चेहरे पर सवार। दाओ उत्सुकता से लीना की चूत चाटी, उसमें कराही, 'म्म्म... कितनी मीठी,' कंपन लीना की सांसदार सिसकियाँ खींचे। काई की गति तेज, जोश से पीटा, 'ले ले हमें, जान... आह्ह!' दाओ की इंद्रियाँ ओवरलोड—लीना का स्वाद, काई की भराई—आनंद की ओर। लीना पहले आई, नीचे पीसकर तीखी चीख से, 'दाओ... हाँ!' मुंह भर दिया।

काई ने दाओ को चारों पर उलट दिया, पीछे से डॉगी स्टाइल दोबारा घुसा, लीना नीचे चाट रही जहां जुड़े। दाओ की चीखें चरम पर, 'जोर से... चोद, हाँ! आआआह!' कई चरम फाड़े, शरीर जोरदार कांपा। काई कराहा, 'तेरे लिए... उन्घ!' गहराई में उंडेला जब लीना की जीभ आनंद लंबा किया। वो उलझन में गिरे, कराहें तृप्त सिसकियों में बदलीं, सार्वजनिक खतरा हर एहसास को तेज—हवाएँ राज फुसफुसाईं, तारे उनके अनुष्ठान गवाह। दाओ का परिवर्तन पूरा, इच्छा पूरी एकीकृत।

बालकनी पर उत्तर-चरम में उलझे, दाओ काई और लीना के बीच बसी, उनके स्पर्श कोमल सहलाहटें जो तृप्त काया नक्शा रही। 'तूने अपनी ताकत हासिल की,' लीना ने फुसफुसाया, कंधे को चूमा। काई की आंखें प्रेम से चमकीं। 'हमेशा मेरी।' दाओ स्वप्निल मुस्कुराई, शरीर तृप्ति से गुनगुना, रोमांटिक दिल भरा। फिर भी जब काई उठा जाने को, उसने ताबीज उसके हाथ में दबाया—लिफाफे से बंधा। 'जब तैयार हो पढ़ना,' उसने धीरे कहा, परछाइयों में गायब।

लीना के साथ अकेली, दाओ ने नोट खोला: 'मेरे साथ भाग, इस जाल से निकल। आजाद आसमानों तले शादी कर।' उसकी नसें दौड़ीं—जागी इच्छाएँ यहाँ जड़ें, या काई के साथ रोमांटिक भागना? चुनाव लटका, सस्पेंस रात की हवा को गाढ़ा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दाओ ने मास्टर अरुण को कैसे बहकाया?

दाओ ने साड़ी उतारकर खुद को समर्पित किया और चुदाई से भक्ति साबित की।

थ्रीसम में क्या-क्या हुआ?

बालकनी पर दाओ ने काई को राइड किया, लीना ने चाटा और चूसा, कई चरम आए।

कहानी का अंत कैसा है?

काई भागने का प्रस्ताव देता है, दाओ के सामने रोमांटिक चुनाव लटकता है।

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डाओ की फुसफुसाती कामुक कमलें

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