ज़ारा की देर रात ब्रू लालसा
बंद हो रहे कॉफी शॉप की शांत गुनगुनाहट में, एक लटकती नज़र ने वर्जित इच्छा का उबलता ब्रू जला दिया।
ज़ारा की फुसफुसाती लालसाएँ फूट पड़ीं
एपिसोड 1
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कॉफी शॉप की लाइटें मद्धम पड़ गईं, लेकिन ज़ारा की मुस्कान और चमकदार हो गई, उसकी काली आँखें खाली काउंटर के पार मेरी आँखों में अटक गईं। वो एसप्रेसो मशीन को जानबूझकर धीरे-धीरे पोंछ रही थी, उसके कूल्हे इतने हिल रहे थे कि मुझे खींच लें। 'आखिरी कॉल,' वो बुदबुदाई, आवाज़ भाप पर मखमल सी। मुझे तब पता चल गया, जब आखिरी कस्टमर के पीछे दरवाज़ा क्लिक करके बंद हुआ, कि ये रात पाप और कैफीन जैसी लगेगी—गर्म, लत लगाने वाली, जाने से नामुमकिन। मैं एक घंटे से ज़्यादा अपनी ब्लैक कॉफी को घूँट रहा था, इस आरामदेह कोने वाले स्पॉट में भीड़ पतली होती देख रहा था। बिज़नेस ट्रिप की उदासी ने मुझे रुकाए रखा, लेकिन वो—ज़ारा, उसके नेम टैग पर लिखा था—वो ही मुझे स्टूल से चिपकाए रखी। वो काउंटर के पीछे रात की मालकिन सी घूम रही थी, हर डालना और पोंछना एक शरारती लय से भरा जो मशीन की भाप को फीका कर देता। जैसे ही घड़ी बंद होने के बाद टिक-टिक करने लगी, उसने 'ओपन' का साइन 'क्लोज़्ड' कर दिया एक ठाठ से, उसके लंबे जेट-ब्लैक बाल झूलते हुए जैसे पर्दा उठा एनकोर के लिए। हमारी नज़रें मिलीं, और वो मेरी तरफ बढ़ी, कूल्हे हिलाते हुए उस छोटे काले स्कर्ट और बॉडी को चिपकाते टॉप में जो उसके कर्व्स को सही से जकड़ रहा था। 'क्या मुझे तुम्हें बाहर करना पड़ेगा, हैंडसम?' वो चिढ़ाई, आवाज़ में एक लहजा जो राज़ों का इशारा देता। एशियन फीचर्स तेज़ और मोहक, गर्म गोल्डन स्किन नरम पेंडेंट लाइट्स के नीचे चमक रही, वो इतने करीब झुकी कि मुझे उसकी खुशबू आ गई—वनीला और ताज़ा बीन्स। मैं मुस्कुराया, पीछे झुकते हुए। 'केवल अगर तुम वादा करो कि पहले मुझे कुछ स्पेशल ब्रू करोगी।' उसकी हँसी गहरी, आमंत्रित करने वाली, काली भूरी आँखें शरारत से चमक रही। 'शहर से बाहर का,...


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