ज़ारा का थ्रीसम एक्स्टेसी जागरण
यूर्ट की चमक में, ज़ारा एक्स्टेसी का हुक्म देती है, अपनी बिखरती खुद से डरती हुई।
ज़ारा की छेड़खानी भरी भंवर: आनंदमय समर्पण
एपिसोड 4
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मोमबत्तियों की रोशनी वाले तंत्र यूर्ट में उत्सुकता की धड़कन थी जब ज़ारा नखारोवा, उसकी गोरी-चिट्टी बदन पारदर्शी रेशमी कपड़े में लिपटा, लिना वॉस और काई रिवेरा की आँखों में आँखें डाल ली। उसकी शरारती मुस्कान आने वाले छेड़छाड़ भरे हुक्मों का इशारा दे रही थी, हवा तेल वाली मीठी खुशबू और अनकही हवस से भरी हुई। उसके गले में लटकन चमक रही थी, जो इस रिट्रीट की सुलगती गहराइयों में उनकी किस्मत बाँध रही थी। तंत्र यूर्ट ने ज़ारा, लिना और काई को झिलमिलाती मोमबत्तियों की रोशनी के कोकोन में लपेट लिया, हवा चंदन की अगरबत्ती और सिल्क के दरवाजे से घुसती समुद्री हवा की हल्की नमकीन गंध से भारी। तेल लगे मैट कम रोशनी में चमक रहे थे, जिसने बदनों को समर्पण के लिए बुलाया। ज़ारा, उसकी गोरी-चिट्टी काया बहते सरोंग से उभरी हुई, महसूस कर रही थी कि रिट्रीट के तंत्र सेशन की शुरुआत होते ही उसके अंदर एक सिहरन दौड़ गई। उसकी शरारती प्रवृत्ति उफान पर आ गई, आँखें लिना के पतले, एथलेटिक बदन पर नाच रही थीं—गोरे बाल पीछे बाँधे, जर्मन सटीकता उसके स्थिर पोज़ में—और काई के धूप से चमकीले लैटिना गठन पर, काले घुंघराले बाल उसके शरारती दांतों वाली मुस्कान को फ्रेम कर रहे। वे घेरे में बैठे थे, घुटने छूते हुए, सुविधाप्रदाता की आवाज़ धीरे-धीरे गायब हो गई क्योंकि साँस लेने के व्यायाम ने उनकी लय मिला दी। ज़ारा का दिल धड़क रहा था; बीच के योगा स्टूडियो वाली छेड़छाड़ उसके दिमाग में बसी हुई थी, लेकिन यहाँ, कमजोरी खुल गई। 'अपनी हवस में साँस लो,' गाइड बुदबुदाई, लेकिन ज़ारा के ख्याल हुक्म की तरफ भटक गए। वो आगे झुकी, उसकी लटकन—चाँदी का कमल जिसमें पुरानी रून उकेरी गई थीं—झूल रही, रोशनी पकड़ रही। लिना की नीली आँखें उससे मिलीं, एक चिंगारी भड़क गई। काई ने फुसफुसाया, 'हमें लीड करो, ज़ारा।' ये...


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