क्लोई के देहाती बैरल उमंग
ओक की खुशबू वाली फुसफुसाहट शहराती लड़की की छिपी आग जला देती है।
च्लोई की लाल बेलों का मखमली समर्पण
एपिसोड 3
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वो मेरे बैरल रूम में थेम्स की हवा की तरह घुस आई, धूप वाली ड्रेस में लिपटी हुई चतुराई और शालीनता, जो नीचे की वक्रताओं का इशारा भर देती थी। क्लोई बेनेट की नीली-ग्रे आँखें मेरी सबसे बेहतरीन वाइन के गिलास के ऊपर मेरी आँखों से टकराईं, शहर वाली लड़की की चुनौती से चमकती हुईं। मुझे तभी पता चल गया, जब ओक की हवा हमारे चारों तरफ गाढ़ी हो गई, ये टेस्टिंग किसी प्राइमल चीज़ में बदलने वाली थी, ऐसी जो हम दोनों को हाँफते और और चाहते छोड़ देगी। क्लोई के जूतों तले कंकड़ च crunch करते हुए वो दाख की बेलों की कतारों में घूमी, उसके हल्के भूरे लहराते बाल दोपहर के देर के धूप में जले हुए सोने की डोरों की तरह चमक रहे थे। मार्कस ने उसे मेरी तरफ भेजा था—किसी नीलामी हाउस कनेक्शन से टिप, उसने कहा, हालाँकि मुझे शक था कि इससे ज्यादा कुछ था। वो पूरी तरह ब्रिटिश थी, उसकी आवाज़ में वो शालीन लचक ग्रामीण शांति को चीरती हुई मिट्टी, फसल, मेरे सेलर में बूढ़े हो रहे बैरलों के बारे में पूछ रही थी। मैंने उसे घिसे हुए पत्थर के सीढ़ियों से नीचे बैरल रूम में ले जाया, हवा ओक और खमीर कर रहे फलों की भारी खुशबू से लदी हुई। लालटेनें टिमटिमा रही थीं, गर्म परछाइयाँ विशालकाय लकड़ी के बैरलों पर पड़ रही थीं जो प्राचीन पहरेदारों की तरह ढेर लगे थे। मैंने उसके लिए एक जवान बैरल से टेस्ट डाला, वाइन गिलास में गहरी रूबी रंग की। 'इसमें धरती का स्वाद है,' मैंने उसे बताया, देखते हुए उसके होंठ सिकुड़ते हुए जब वो घुमाई। 'केंट की मिट्टी, पूरा का पूरा।' उसने चुस्की ली, उसकी नीली-ग्रे आँखें मेरी आँखों पर मेरी चतुर चमक के साथ जमीं। 'धरती जैसा, हाँ। किनारों पर थोड़ा खुरदरा, जैसे इसे बनाने वाला आदमी।' उसकी चालाकी ने...


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