क्रिस्टीना की गूंजती स्टूडियो की परछाइयाँ

मद्धम रोशनी में फुसफुसाहटें बचाव को दर्द भरी समर्पण में बदल देती हैं।

मोती उघड़ते: क्रिस्टीन का श्रद्धापूर्ण समर्पण

एपिसोड 5

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क्रिस्टीना की गूंजती स्टूडियो की परछाइयाँ
क्रिस्टीना की गूंजती स्टूडियो की परछाइयाँ

मेरा हाथ स्टूडियो के दरवाजे पर पड़ा तो वो चरमराया, पुरानी लकड़ी धीरे से कराह उठी जैसे अंदर के राज़ खोलने को अनिच्छुक हो, और वहाँ वो थी—क्रिस्टीना, आधी-अधूरी कैनवासों की परछाइयों के बीच एक ही लैंप की नरम चमक में नहाई हुई। एम्बर रोशनी ने उसके शरीर के किनारों को पकड़ा, उसके आसपास की बिखरी हुई चीजों पर कोमल हाइलाइट्स डाले, और मेरा दिल सीने में ठिठक गया, उस नज़ारे से एक जाना-पहचाना दर्द फूट पड़ा। उसके गहरे भूरे कर्ल्स एक तरफ घने झुके हुए थे, उन गहरे भूरे आँखों को फ्रेम करते हुए जो मेरी तरफ उठीं आश्चर्य और कुछ गहरी, अनकही चीज़ के मिश्रण से—एक लालसा की चमक जो आज रात मैंने यहाँ लाई उथल-पुथल को आईना दिखा रही थी। मैं उस नज़र में हमारी आखिरी रात की गूंज सुन सकता था, उसके शरीर का मेरे सामने झुकना, सिर्फ उसके बाद खामोशी में गायब हो जाना। वो खड़ी थी, अपनी बचाव की मुद्रा में भी सुंदर, एक स्लिम सिल्हूट सादे सफेद ब्लाउज़ और हाई-वेस्टेड स्कर्ट में जो उसकी शहद जैसी स्किन को चिपक रही थी, कपड़ा इतना चिपका कि नीचे की वक्रताओं का इशारा दे रहा था। हवा में पेंट और उसके परफ्यूम की जस्मीन की हल्की खुशबू गूंज रही थी, एक नशे वाली मिश्रण जो मुझे लपेट रही थी जैसे एक आलिंगन जिसकी मुझे भूख का एहसास ही न था। फैमिली फिएस्टा की तैयारी जगह भर रही थी—रंग-बिरंगे पेपर पिकाडो आधे लटकाए, माराकास कोनों में छिपे—लेकिन कुछ मायने न रखता, उनकी चटक चहल-पहल हमारी बीच की बिजली जैसी खिंचाव के आगे फीकी पड़ रही थी। वो मेरे कॉल्स, टेक्स्ट्स से बच रही थी, उस आखिरी उलझी रात से, हर अनुत्तरित मैसेज अनिश्चय की चाकू को मेरे ख्यालों में गहरा घोंप रहा था। क्यों वो पीछे हट गई? क्या फैमिली की फुसफुसाहटें, उन चुराई लम्हों पर मंडराती...

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Christine Flores

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