एस्थर का भोर का हिसाब: परिणाम खिल उठे
ग्रीनहाउस की नम आगोश में, उसके शब्दों ने मुझे नंगा कर दिया इससे पहले कि उसका स्पर्श करता।
एस्थर का बगीचा आरोहण: मेंटर का रस्मी चयन
एपिसोड 5
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भोर की पहली किरणें ग्रीनहाउस के कांच के पैनलों से छनकर आईं, हर कोने में भरी विदेशी फूलों पर सुनहरी धुंध छोड़ती हुईं, उनके पंखुड़ियां नरम, ओस भरी शान से खुल रही थीं मानो रात के राज़ फुसफुसाने के लिए जाग रही हों। हवा में नम मिट्टी की मिट्टी जैसी खुशबू भारी लटक रही थी जो जस्मीन और ऑर्किड के मीठे, नशेले अमृत से मिली हुई थी, हर सांस मुझे इस हरी-भरी, बंद दुनिया में और गहरा खींच रही थी। एस्थर ऑर्किड और फर्न्स के बीच खड़ी थी, उसके लंबे काले बाल दो निचली चुटियों में बुनकर रखे हुए जो उसके हिलने-डुलने से हल्के झूल रही थीं, रात के अंधेरे से काते रेशमी धागों की तरह रोशनी पकड़ रही थीं। उसने कंधों पर हल्का शॉल लपेटा हुआ था, जो उसके गहरे काले रंग की चिकनी त्वचा से रगड़कर फुसफुसा रहा था जब वो मेरी तरफ मुड़ी, वो हल्की सरसराहट शांत में गूंज रही थी जैसे प्रेमी की सिसकी। उसके गहरे भूरे आंखें मेरी आंखों को उस आत्मविश्वास भरी गर्माहट से पकड़े हुए थीं जो मैं तरसने लगा था, नजर जो मेरी रक्षा भेदती थी, लेकिन उसकी नजर में नई धार थी, एक हिसाब जो मेरे सीने में दिल को लड़खड़ा देता था। रात की सच्चाइयों के बाद मैं खुद में सिमट गया था, परिणामों का बोझ हमारी चारों तरफ की नम हवा की तरह दबा हुआ था, गाढ़ा और अटल, मेरे दिमाग की धुंध की तरह—स्टाफ के बीच फुसफुसाते कांड, परिवार की विरासत का अटल पकड़ जो हमारी इस नाजुक कलि को दबोचने को बेताब था। मेरे विचार दौड़ रहे थे: मैं उसे अपनी दुनिया के सायों से कैसे बचाऊं, इस अलग-थलग एस्टेट से जो जेल और शरण दोनों बन गया था? लेकिन वो चुप्पी को सड़ने नहीं देनेवाली थी, उसकी मौजूदगी हरी भरी अफरा-तफरी में प्रकृति की ताकत थी।...


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