अमिरा की लाउंज नज़र ने वर्जित चिंगारी जला दी
दुबई के एलीट लाउंज के मखमली परछाइयों में फुसफुसाई चुनौती ने उसकी नाड़ी को वर्जित की ओर दौड़ाया।
दुबई की छायाओं में अमीरा का साहसी काफ्तान खुला
एपिसोड 1
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दुबई के एयरपोर्ट का वीआईपी लाउंज उस शाम एक सोने का पिंजरा लग रहा था, उसके विशाल चमकदार संगमरमर के फर्श पर धंसे हुए लाइट्स की नरम चमक झिलमिलाती हुई, अनंत सुनहरी जगह का भ्रम पैदा कर रही थी। हवा में क्लाइमेट कंट्रोल की हल्की गुनगुनाहट थी, महंगे परफ्यूम की फुसफुसाहटें और बार से ठंडी व्हाइट वाइन की हल्की कुरकुरी चुभन लिये हुए। मैं वहाँ ऊँचे स्टूल पर थोड़ा झुका हुआ बैठा था, मेरी तीसरी व्हिस्की मेरी रगों को गर्म कर रही थी लेकिन लगातार उड़ानों की हड्डी तक उतर चुकी थकान को दूर करने में ज्यादा मदद नहीं कर रही थी। गल्फ में बिजनेस डील्स ने मुझे इस देरी भरी कनेक्शन की लिम्बो में बहा दिया था, मेरा दिमाग दूर शहरों के आधे-अधूरे चेहरों की ओर भटक रहा था, इस बाँझ लग्जरी के बीच कुछ असली की ललक में। बाकी मेहमान बेमानी हो गए—फोन में बुदबुदाते बेनाम एग्जीक्यूटिव्स, फ्लाइट अटेंडेंट्स चुपचाप आराम के पल चुराते हुए—जब तक फ्रॉस्टेड दरवाजे न्यूमेटिक सिसकी के साथ न खुल गए। जैसे ही अमिरा महमूद वीआईपी लाउंज में कदम रखी, लंबी उड़ान से थकी हुई लेकिन उस बहते कफ्तान में रानी की तरह खुद को ढोते हुए, मुझे पता चल गया कि मुझे उसे जानना ही है। उसके कदमों में सहज राजसीपन था, हवा में घंटों के बोझ से कंधों का हल्का झुकाव झूठ न बोल सका; कफ्तान, गहरे नीलम नीले रेशम का झरना जो नाजुक सोने की कढ़ाई से सजा था, उसके घंटे के आकार के भरे-भरे बदन से चिपकता फिर रेगिस्तानी हवाओं की तरह फूल जाता, उसके चिकने मोटिया त्वचा को फुसफुसाते हुए छूता जो शांत कमरे में गूंजता-सा लगता। उसके जीवंत लाल बाल निचली रोशनी में आग की तरह चमके, वो ढीले बीच की लहरें जंगली बेतरतीबी से उसकी पीठ पर लुढ़कतीं, ऊँचे गालों की हड्डियों और भरी होंठों को फ्रेम...


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